लाखों फैन वाली कमल कौर उर्फ कंचल के अंतिम संस्कार में पहुंचे सिर्फ 3 लोग, “ मां, बहन और एक भाई ही श्मशान पहुंचे”
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
नशे की लत, परिवार की बेरुखी और अंत में सरल संस्कार की ममता…एक अनजान की आखिरी विदाई। वो लाश लावारिस नहीं थी, कभी अंबाला शहर की गलियों में ‘कमल उर्फ कालू’ नाम से पहचाना जाने वाला एक व्यक्ति, अब एक ख़ामोश कहानी बन चुका है।
45 वर्षीय कमल की ज़िंदगी नशे की गिरफ्त में उलझी रही और अंत में उसकी मौत भी अकेलेपन की चुप्पी में ही हो गई। 13 जून की रात, टोकियो (माजरा) क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में कमल की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मृतक की शिनाख्त के प्रयास शुरू हुए। पता चला कि कमल हरियाणा के अंबाला शहर का निवासी था और लंबे समय से नशे की लत से जूझ रहा था।
जब पुलिस ने कमल के परिजनों से संपर्क किया, तो आशा थी कि कोई आएगा और बेटे, भाई या पिता का अंतिम संस्कार करेगा। लेकिन उस वक्त सबसे बड़ा दुख ये रहा कि परिवार ने शव को स्वीकार करने और अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।
ऐसे कठिन समय में ‘सरल संस्कार एंड वेलफेयर सोसाइटी’ ने मानवता का परिचय दिया। पुलिस से संपर्क होते ही संस्था की टीम ने आगे आकर पूरे विधि-विधान से कमल का अंतिम संस्कार करवाया। समाज ने जिसे ठुकरा दिया, उसे इस संस्था ने वो सम्मान दिया, जिसकी हर इंसान को मृत्यु के बाद आवश्यकता होती है।
संस्था के सदस्यों ने न केवल विधिपूर्वक अंतिम क्रियाएं संपन्न की, बल्कि इस पूरे प्रकरण को बेहद संवेदनशील और करुणा भरे भाव से संभाला। कमल की आत्मा को शांति मिले और उसके परिवार को संवेदना व सद्बुद्धि -यही संदेश संस्था ने समाज को दिया है।
आज जब समाज में रिश्ते सुविधा और स्वार्थ पर टिके नजर आते हैं, ऐसे में सरल संस्कार एंड वेलफेयर सोसायटी जैसे संगठन मानवता की असली मशाल बनकर उभरते हैं।