पांडवों ने एक ही रात में बना दिया था बड़ा मैदान, एक बार सरसों उगाई, अब खुद व खुद उगती है

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हिमखबर डेस्क 

हिमाचल का महाभारत से गहरा नाता है। पांडवों और कौरवों की कई कहानियां हिमाचल से जुड़ी हुई हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही खूबसूरत कहानी से रू-ब-रू करवाएंगे, जो महाभारत की महान गाथा को जीवंत करती है। इस कहानी का नाता कुल्लू के एक ऐसे खूबसूरत स्थल से है, जो अभी तक दुनिया की नजर में नहीं आया है।

स्विट्जरलैंड से भी खूबसूरत यह स्थल कुल्लू के बागा सराहन मेें है, जो एक ऐसा अनछुआ पर्यटक स्थल है, जिसे आज तक पर्यटन मानचित्र पर उभारा नहीं जा सका है। प्रदेश में ऐसे बहुत कम लोग हैं, जो बागा सराहन को जानते हैं और यहां आ चुके हैं।

पांडवों ने उगाई थी सरसों

इस गांव का महत्व धार्मिक रूप से भी है, क्योंकि पौराणिकता के साथ इसका संबंध बताया जाता है। यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि बागा सराहन में कभी महाभारत काल में कौरव और पांडव भी आए थे।

पांडवों ने यहां सराहन का मैदान समतल किया था। पांडव यहां से कुछ दूरी पर एक अन्य स्थान पर भी ठहरे थे, जहां उन्होंने सरसों उगाई और बताया जाता है कि आज भी वहां इस तरह से सरसों खुद ब खुद उग जाती है। धार्मिक महत्व वाले इस इलाके की सुंदरता बेहद ज्यादा है, जिसे विकसित करने पर यहां बड़ा पर्यटन क्षेत्र बन सकता है।

बागा सराहन के इतिहास को लेकर स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां स्थित विशाल मैदान पांडवों ने एक ही रात में बनाया था और कौरवों ने इसी गांव के साथ लगते दिआउगी गांव में मैदान बनाया था। लोगों ने बताया कि ब्रिटिश राज के दौरान अंग्रेज यहां से बशलेऊ पास होते हुए कुल्लू जाते थे।

जिंदा बची थी सिर्फ एक महिला

पौराणिक कथा के अनुसार जब बूढ़े सरौहनी यानी शाना ऋषि बंजार के देउरी क्षेत्र से यहां आए थे, तो उन्होंने यहां पर तपस्या कर रहे एक ड्रोपू देवता को बरछा मारकर भगाया था, जिसके बाद यहां मैदान के साथ बहती नदी सर्पीले आकार में बनी थी।

जनश्रुतियों के अनुसार एक बार पूरा सराहन गांव पहाड़ी के नीचे दब गया था, उस जगह का नाम डाक डावर है। पहाड़ी के नीचे दबने से केवल एक ही औरत जिंदा बच पाई थी, जिसने बाद में एक भाट से शादी की और उसकी पीढ़ी यहां भाटनु खानदान के रूप में आगे बढ़ी।

यहां अन्य सात खानदान भी हैं, जो उस औरत के ही वंशज माने जाते हंै। किसी समय शाना ऋषि कुल्लू दशहरा में जाते थे, लेकिन जब से भगवान रघुनाथ जी के रथ के दाएं ओर चलने के लिए बालू नाग और श्रृंगा ऋषि के देवलुओं के बीच विवाद और लड़ाई हुई थी, तब से ये देवता कुल्लू दशहरा में नहीं जाते हैं।

ऐसे पहुंचे बागा सराहन

बागा सराहन के लिए रामपुर और निरमंड से होते हुए रास्ता निकलता है। जहां एक तरफ श्रीखंड यात्रा के लिए लोग जाते हैं, वहीं दूसरी ओर एक रास्ता बागा सराहन के लिए पहुंचता है।

बेहद खूबसूरत है यह जगह

बागा सराहन बेहद खूबसूरत और रमणीक स्थल है, जिसे यदि विकसित किया जाए, तो यहां बड़े पैमाने पर पर्यटन कारोबार बढ़ सकता है।

यहां की सबसे बड़ी समस्या जिला मुख्यालय तक रोड कनेक्टिविटी की है, क्योंकि जिला मुख्यालय कुल्लू तक पहुंचाने के लिए यहां के लोगों को लगभग सात घंटे का सफर तय करना पड़ता है।

बागा सराहन के लोग चाहते हैं कि कुल्लू जिला मुख्यालय को जोडऩे के लिए एक मार्ग का सर्वे किया गया है, जहां से केवल 28 से 30 किलोमीटर की दूरी पर जिला मुख्यालय पड़ता है।

इस मार्ग के निर्माण के लिए यदि सरकार बजट दे, तो बागा सराहन तक पहुंचने में पर्यटकों को आसानी होगी और बड़े पैमाने पर यहां रोजगार के द्वार खुल खुल सकेंगे।

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