पहली को पौंग विस्थापितों पर मंथन, नई दिल्ली में होगी बैठक, कोरोना संक्रमण के चलते साल बाद हो रही है मीटिंग

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विशेष संवाददाता—शिमला

सालों से विवादों में चल रहे पौंग विस्थापितों को न्याय दिलाने के मामले में एक और महत्त्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। कोविड के कारण लगभग एक साल से दिल्ली में यह बैठक नहीं हो सकी थी, जिसके लिए अब तारीख तय कर दी गई है। पहली फरवरी को दिल्ली में बैठक होगी, जो कि सचिव जल संसाधन मंत्रालय की अध्यक्षता में होगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जो मामला चल रहा है, उसके तहत उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है और इस कमेटी की बैठक एक साल से नहीं हो सकी थी। कोरोना के कारण यह बैठक नहीं हो पाई, लिहाजा अब बैठक होने जा रही है, जिसमें पौंग विस्थापितों के मसले पर चर्चा होगी। करीब आठ हजार पौंग विस्थापित हैं, जिनको अभी तक राजस्थान में जमीन नहीं मिल पाई है। इतनी ही संख्या में लोगों को राजस्थान व उसके आसपास के क्षेत्रों में मुरब्बे दिए गए।

इसमें भी विवाद है, क्योंकि वहां पर ऐसी जगह सीमा क्षेत्र में दे दी गई, जहां पर पानी भी नहीं, तो ऐसे में किसान वहां जाकर खेती कैसे करेंगे। यह विवाद अभी भी चल रहा है, जिसके बाद श्रीगंगानगर व कुछ दूसरे स्थानों पर जमीन देखी गई। पिछले साल कुछ लोगों को वहां पर मुरब्बे दिए भी गए, परंतु सभी लोग अभी तक न्याय नहीं ले पाए हैं।

पौंग विस्थापितों का दर्द सालों पुराना है, जिनके जख्म अभी तक नहीं भरे गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में विवाद खत्म करने और लोगों को राहत प्रदान करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है जो इस मसले पर आगे बातचीत की जाएगी। बताया जाता है कि जल संसाधन मंत्रालय में सचिव स्तर के अधिकारी बदले गए हैं और नए सचिव के आने पर अब उनसे बातचीत की जाएगी। यहां से अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व आर.डी.धीमान इस बैठक में जाएंगे, जो वहां पर हिमाचल का पक्ष रखेंगे।

हिमाचल लगातार विस्थापितों के लिए जमीन मांग रही है और जमीन नहीं देने की एवज में मुआवजा दिए जाने का भी एक प्रस्ताव दिया गया था। क्योंकि अब यहां के लोग भी वहां जाकर नहीं बसना चाहते इसलिए मुआवजा चाहते हैं, परंतु राजस्थान सरकार ना नुकर कर रही है। इस कारण से पौंग के विस्थापितों को अब तक उनका जायज हक नहीं मिल पाया है। देखना होगा कि इस बैठक में आगे क्या नतीजा निकलता है।

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