पठानकोट रेलवे स्टेशन को डलहौजी रोड शिफ्ट करने के खिलाफ जनता ने सीएम-सांसदों और नेताओं से मामले में मांगा हस्तक्षेप

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हिमखबर डेस्क

जिला कांगड़ा और मंडी की आम जनता के लिए लाइफ लाइन कहलाने वाली कांगड़ा घाटी रेल को लेकर एक बार फिर लोगों को चिंता सताने लगी है। अंग्रेजों के समय में निर्मित पठानकोट-पपरोला-बैजनाथ-जोगिंद्रनगर रेल पिछले करीब चार वर्षों से बाधित पड़ी है, जिससे क्षेत्र की जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अब इस रेल सेवा के पुन: संचालन की मांग के साथ-साथ पठानकोट रेलवे स्टेशन को ‘डलहौजी रोड’ में शिफ्ट करने की कथित योजना का भी तीव्र विरोध शुरू हो गया है। दोनों जिलों के लोगों ने राज्यसभा सांसद प्रोफेसर डा. सिकंदर कुमार, कांगड़ा-चंबा के सांसद डा. राजीव भारद्वाज, पूर्व मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर, पूर्व राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी, राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जनता का कहना है कि पठानकोट रेलवे स्टेशन उत्तर भारत का एक ऐतिहासिक और रणनीतिक जंक्शन रहा हैए जो जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को जोडऩे का मुख्य केंद्र है। ऐसे में इसे शिफ्ट करना पूरे रेल नेटवर्क की रीढ़ तोडऩे जैसा होगा। लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन शिफ्ट होने पर क्षेत्र में आंदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अंत में जनता ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि यह केवल एक स्टेशन का मुद्दा नहीं, बल्कि हिमाचल, पंजाब की रेल कनेक्टिविटी, पर्यटन, रोजगार, आम लोगों की सुविधा से जुड़ा गंभीर विषय है, जिस पर शीघ्र और सकारात्मक कार्रवाई आवश्यक है।

आश्वासन…पठानकोट से ही चलेगी कांगड़ा ट्रेन

इसके बारे में कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र के सांसद डाक्टर राजीव भारद्वाज ने बताया कि कांगड़ा घाटी को जाने वाली ट्रेन का संचालन पूर्व की तरफ पठानकोट रेलवे स्टेशन से होगा। इस मामले को वह केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष उठा चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही कांगडा घाटी को जाने वाली ट्रेन का उद्घाटन किया जाएगा। साथ पूर्व की तरह इस का संचालन पठानकोट से ही किया जाएगा।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को होगा नुकसान

पठानकोट हिमाचल के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों जैसे ज्वालामुखी, चिंतपूर्णी, बगलामुखी,कांगड़ा मंदिर, चामुंडा मंदिर, बैजनाथ मंदिर, धर्मशाला, पालमपुर और जोगिंदरनगर का मुख्य प्रवेश द्वार है। स्टेशन परिवर्तन से पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। होटल उद्योग, टैक्सी और बस व्यवसाय को नुकसान होगा। स्थानीय रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों में गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।

कांगड़ा घाटी रेलवे पर पड़ेगा सीधा असर

कांगड़ा घाटी रेलवे, जो एक विरासत रेललाइन के रूप में जानी जाती है, पूरी तरह पठानकोट से जुड़ी हुई है। स्टेशन शिफ्ट हो कर इसे डलहौजी रोड लाने की स्थिति में यात्रियों का सीधा संपर्क टूट जाएगा। ट्रेन कनेक्टिविटी प्रभावित होगी। यात्रियों को अतिरिक्त दूरी और खर्च उठाना पड़ेगा।

हिमाचल की रेल सुविधाएं और सीमित हो जाएंगी। यात्रियों की सुविधाओं पर भी पड़ेगा सीधा असर पड़ेगा। पठानकोट स्टेशन वर्तमान में बस स्टैंड, टैक्सी, अस्पताल, होटल और बाजार जैसी सुविधाओं से जुड़ा हुआ है।

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