निर्वासित तिब्बतियों का चीन के खिलाफ विरोध

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धर्मशाला, राजीव जसवाल

भले ही आज चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना अपने देश में सौ साल पूरे होने का जश्न मना रही हो, मगर कुछ देश और उस देश के निर्वासित लोग कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन के इस जश्न की कड़े शब्दों में भतर्सना करते हुये उनकी इस सेलिब्रेशन को ब्लैक डे के तौर पर मना रहे हैं|

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की ग्लोबल सिटी मैकलोड़गंज में बीते 60 सालों से निर्वासितों की जिंदगी जी रहे तिब्बतियों ने आज मैकलोड़गंज की चौक पर इकट्ठा होकर कैंडल मार्च निकाला और सीपीसी की सैलिब्रेशन की कड़े शब्दों में निंदा की|

इस दौरान रीजनल तिब्बत वूमन एसोसिएशन और सैंट्रल तिब्बत वूमन एसोसिएशन के पदाधिकारियों समेत निर्वासित तिब्बतियों ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति और उनकी पार्टी देश और दुनिया की आंखों में सदा से धूल झौंकते आये हैं और आज भी झौंक रहे हैं, मगर उनका ये ढंकोसला लंबे वक्त तक नहीं चलने वाला|

आज नहीं तो कल उनका पर्दाफाश ज़रूर होगा, वो दुनिया के सामने मानव अधिकारों की दुहाई देते हैं मगर सच तो ये है कि उनका कोई भी पड़ोसी देश आज उनसे खुश नहीं है, चीन की विस्तारवादी नीति ने चीन की हर जगह पोल खोल कर रख दी है।

रीजनलर तिब्बत वूमन एसोसिएशन की अध्यक्ष तेनजिन नीमा ने कहा कि शी जिनपिंग आज भले ही तिब्बत के विकास की बात करते हों मगर हकीकत तो ये है कि उन्होंने तिब्बत के संसाधनों और यहां के लोगों का भरपूर शोषण किया है, विकास के नाम पर अपने प्रोजेक्ट स्थापित कर रखे हैं और तिब्बत को अंदर ही अंदर से खोखला कर दिया है।

सीटीडब्लूए की प्रोजेक्ट ऑफीसर तेनजिंन थांडरो ने कहा अरुणाचाल प्रदेश और तिब्बत में शी जिनपिंग के दौरों के मद्देनजर पड़ोसी देशों को कड़ी निगरानी से देखना चाहिये और भारत को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिये।

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