
शाहपुर – नितिश पठानियां
देश में सबसे पहले ड्रोन फ्लाइंग पायलट सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का कदम उठाने वाले हिमाचल में अब ड्रोन बनाना भी सिखाया जाएगा। आने वाले समय में ड्रोन के अचानक बढऩे वाले इस्तेमाल को देखते हुए हिमाचल सरकार ने दो और बड़े कदम ड्रोन फ्लाइंग तकनीक को लेकर उठाए हैं।
राज्य का आईटी विभाग शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभागों से मिलकर इस दिशा में नए फैसले ले रहा है। राज्य सरकार ने शाहपुर आईटीआई में सबसे पहले ड्रोन फ्लाइंग पायलट का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। इसमें शाहपुर और धर्मशाला कालेज के 50 स्टूडेंट ड्रोन उड़ाना सीख रहे हैं।
इसके बाद इन्हें ड्रोन फ्लाइंग पायलट का अथॉराइज सर्टिफिकेट मिलेगा। यह पूरे देश में मान्य होगा, लेकिन हिमाचल सरकार इस दिशा में फस्र्ट मूवर एडवांटेज को अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जोडऩा चाह रही है।
लक्ष्य रखा गया है कि इसी साल 500 ड्रोन फ्लाइंग पायलट तैयार करेंगे। इसके बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान एकेडमी के साथ एक एमओयू साइन होगा।
इसके तहत राज्य के 50 डिग्री कालेजों में ड्रोन फ्लाइंग पायलट ट्रेनिंग कोर्स का एकेडमिक क्रेडिट भी स्टूडेंट को मिलेगा। एचपीयू, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी और टेक्निकल यूनिवर्सिटी से संबंधित कालेज इसमें लिए जाएंगे।
इसके साथ ही एक अन्य बड़ा कदम उठाते हुए आईटी विभाग ने ड्रोन इंस्ट्रूमेंटेशन और रिपेयर कोर्स राज्य की सात आईटीआई में शुरू करने का फैसला लिया है।
भारत सरकार की स्किल डिवेलपमेंट मिनिस्ट्री के डायरेक्टर जनरल ट्रेनिंग के साथ इस मसले को उठाया जा रहा है, ताकि अगस्त 2022 से यह कोर्स शुरू हो जाए। इसमें हर साल 300 स्टूडेंट्स का बैच होगा, जो न सिर्फ ड्रोन असेंबल करना सीखेंगे, बल्कि ड्रोन की रिपेयर भी कर पाएंगे।
