डीसी लैंड पर पेड़ों की कटाई मामले में कार्यवाही न होने पर मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन पर कर दी शिकायत

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इंदौरा-व्यूरो- रिपोर्ट

लगभग 15 दिन पहले इंदौरा के पनियाला गांव में डीसी लैंड से कटे हुए पेड़ों के मामले में वन विभाग आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं कर पाया है ज्ञात रहे कि इसी गांव में लगभग दो बर्ष पूर्व भी बहुत बड़ा अबैध खैर का कटान हुआ था जिसमें वन विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया था, परन्तु इतना कुश होने के बाद भी विभाग है कि कछुआ चाल चला हुआ है|

जिसका उदाहरण इस बात से स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है कि इसी गांव में15 दिन पहले डी सी लैंड से पेड़ कटने के बाद भी विभाग आज तक इस जमीन की निशानदेही तक नहीं करवा पाया है जो कि विभाग की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में लाता है। अब यह तो विभागीय अधिकारी ही बता सकते हैं कि क्यों इस अबैध कटान के मामले को दबाया जा रहा है, क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव काम कर रहा है।

बहीं दूसरी तरफ शिकायतकर्ता कर्म चंद द्वारा विभाग की इस कार्यवाही द्वारा नाखुश हैं ओर उन्होंने इस मामले की शिकायत अब मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन पर कर दी है।शिकायतकर्ता कर्म चंद का कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा हमें वार वार इस मामले को ना उछालने का दबाब बनाया जा रहा है और शिकायत के 15 दिन वीत जाने के बाद भी वन विभाग द्वारा ना तो इस डी सी लैंड की निशानदेही करवाई गई है और ना ही अबैध रूप से पेड़ काटने वाले के खिलाफ कोई कार्यवाही की गई है वन विभाग के अधिकारी सीधे सीधे इस सारे मामले को दवाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे आहात होकर हमने अब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन पर की है।

जब इस बारे डीएफओ नुरपुर विकल्प यादव से दूरभाष के माद्यम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं पिछले एक सप्ताह से छुट्टी पर हूँ छुटी से आने के बाद ही इस वारे विस्तृत रूप से बता पाऊंगा। बहीं जब इस बारे रेंज ऑफिसर भदरोया सुमन लता से दूरभाष के माद्यम से बात करनी चाही तो वार वार फोन करने पर भी उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया।

अब प्रशन यह उठता है कि अगर वन विभाग के अधिकारियों का यही हाल रहा तो वन कटुओं पर कौन लगाम लगाएगा अब तो हमारे जंगलों जा भगवान ही रखवाला है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि ऐसे सुस्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही अमल में लाये यदि प्रदेश सरकार ने भी अपना ध्यान इस ओर नहीं दिया तो हमारे जंगल यूं ही बन काटूँओं की भेंट चढ़ कर खत्म हो जायेंगे।

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