
देहरा – शिव गुलेरिया
सिविल अस्पताल डाडासीबा में पिछले दो दिनों से लोगों के लैब में टेस्ट नहीं हो रहे। सिविल अस्पताल में 250 के करीब प्रतिदिन ओपीडी है। दूर-दूर के क्षेत्रों से लोग डाडासीबा में अपना इलाज कराने आते हैं और लोगों को टेस्ट करवाने के लिए महंगे दामों पर बाजार लैब में टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
सरकार भले ही सार्वजनिक मंचों से प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे करती है। लेकिन धरातल पर शून्य हैं। सिविल अस्पताल में 20 पंचायतों के करीब 50 हजार लोगों के स्वास्थ्य की देखरेख करने वाला सिविल अस्पताल डाडासीबा ही है।
आज सिविल अस्पताल डाडासीबा आए ग्रामीणों ने बताया कि हम सुबह से ही लैब के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहे थे,लेकिन हमारे टेस्ट अस्पताल में नहीं हो पाए। जिसके चलते हमें बाजार में निजी लैब में पैसे देकर टेस्ट करवाने पड़े।
वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है पिछले आठ महीनों से लगातार रेडियोलाजिस्ट न होने से लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। आठ महीने पहले दूर-दूर के गांवों के लोग हर बुधवार को पर्ची की डेट लेकर यहां अस्पताल आते थे और घंटों इंतजार करके वापस चले जाते थे।
स्थानीय लोगों ने सरकार से अनुरोध किया है की सरकार ने अल्ट्रासाउंड तो दे दिया लेकिन रेडियोलॉजिस्ट का पद न भरने से यह लाखों रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीन सफेद हाथी बन कर रह गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द रेडियोलजिस्ट का पद भरा जाए जिससे लोगों को सुविधा मिल सके।
क्या कहते हैं अधिकारी
बीएमओ का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे डाक्टर पंकज कौंडल ने बताया कि एसएलटी की ट्रांसफर हो गई है और एनआरएचएम बीमारी की वजह से लीव पर है। शीघ्र ही डेपुटेशन द्वारा ड्यूटी लगाई जाएगी व जो रेडियोलॉजिस्ट यहां आते थे, वह बिलासपुर चले गए हैं। उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई हैं। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
