टोल का झोल: अढ़ाई महीने से उठ रहे विरोध के बोल, तंबू गाड़ धरने पर बैठे हैं यहां के ग्रामीण

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मंडी, 09 जनवरी – डॉली चौहान

लोगों द्वारा दिए जाने वाले टोल के कारण ही फोरलेन जैसे बड़े प्रोजेक्टों का निर्माण होता है। लेकिन यह निर्माण उन लोगों के लिए अभिशाप बन जाता है जिनके क्षेत्र में टोल प्लाजा स्थापित होता है।

उन लोगों को अपने क्षेत्र के आस पास आने-जाने के लिए अपनी ही जेब को ढीला करना पड़ता है। कुछ ऐसा ही होने जा रहा है टकोली पंचायत के ग्रामीणों के साथ।

कीरतपुर मनाली फोरलेन का एक टोल प्लाजा टकोली पंचायत के बीचों बीच स्थापित कर दिया गया है। हालांकि यह अभी चालू नहीं हुआ है लेकिन ग्रामीण इसके नुकसानों को भांपते हुए बीते ढाई महीनों से इसके विरोध में अपनी आवाज को बुलंद किए हुए है। टकोली पंचायत के लोग टोल प्लाजा पर तंबू गाड़कर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे है।

ग्रामीणों का कहना है कि टोल प्लाजा स्थापित होने से पंचायत दो भागों में बंटकर रह गई है। स्थानीय निवासी कृष्ण पाल ठाकुर, ज्ञान चंद और प्रेम चंद ने बताया कि लोगों के घर टोल के एक तरफ है तो जमीन दूसरी तरफ।

यदि अपनी ही जमीन तक गाड़ी लेकर जाना होगा तो उसके लिए टोल अदा करना पड़ेगा। किसी सरकारी कार्यालय या अस्पताल जाना होगा तो भी टोल अदा करना पड़ेगा। इनका कहना है कि टोल को बीना पंचायत की अनुमति के स्थापित किया गया है। ग्रामीणों के लिए इस टोल को पूरी तरह से फ्री किया जाए।

स्थानीय निवासी हेमा देवी और कमला देवी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन को लंबा अरसा बीत गया, लेकिन जिला प्रशासन और एनएचएआई इनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।

कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने आंशिक चक्का जाम किया तो प्रशासन भागा-भागा पहुंच गया था। यदि जल्द ही इसका समाधान नहीं किया गया तो फिर पूरा दिन हाईवे पर चक्का जाम किया जाएगा और इसकी जिम्मेवारी प्रशासन व एनएचएआई की होगी।

वहीं, जब इस बारे में एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ’’टोल प्लाजा अभी शुरू नहीं हुआ है। जो स्थानीय लोग होंगे उन्हें नियम के तहत मात्र 300 रुपए मासिक की दर पर पास जारी होगा।

जिस पर वे पूरा महीना अपने पंजीकृत निजी वाहनों को अनगिनत बारी टोल से गुजार सकेंगे जबकि कमर्शियल वाहनों के लिए अलग से कम शुल्क रखा जाएगा। टोल को फ्री करने का कोई प्रावधान नहीं है।

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