
ब्यूरो- रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। अब लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा की दहलीज पर कदम रखने के लिए जरूरी है कि भाजपा, कांग्रेस सहित प्रमुख राजनीतिक दलों से नेताओं को टिकट प्राप्त हो।
सूर्य का दक्षिणायन शुरू हो चुका है और ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार नेताओं के लिए उनकी कुंडली स्थित ग्रह और ग्रह दशा टिकट प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। इसके साथ ही ग्रह गोचर की स्थिति का भी अहम रोल रहेगा।
उपचुनाव की घोषणा के अनुसार जारी चुनाव कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को राजपत्र में चुनाव अधिसूचित होंगे और प्रत्याशी 08 अक्टूबर को नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। दोनों तारीख का संयोग ज्योतिष के अनुसार शुक्रवार को है। ऐसे में चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले प्रत्याशी की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति बेहतर होनी चाहिए। इतना ही नहीं ग्रहों की गोचरीय अवस्था का भी बहुत महत्व रहेगा।
बलिष्ठ चंद्रमा करता है लोगों को आकर्षित
चंद्रमा का मूल स्वभाव दूसरों पर प्रभावित करना है। प्रभाव का मतलब मानसिक बल की प्रबलता। मानसिक रूप से सशक्त व्यक्ति कमजोर मन वालों को अपनी ओर सहजता से मोड़ लेते हैं। मन की सशक्त तरंगे वातावरण को जातक के पक्ष में लोगों के मन को सहजता से आकर्षित कर लेती है। ऐसे में टिकट लेने वाले का आत्मविश्वास और टिकट देने वालों का प्रत्याशी पर विश्वास तभी जमेगा, जब चंद्रमा अनुकूल होगा।
जीत में रहेगी शनि की भूमिका
जहां टिकट दिलवाने में चंद्रमा की भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं शनि जीत के लिए अहम भूमिका निभाएगा। शनि को न्याय और नेतृत्व का ग्रह माना जाता है। जिनकी कुंडली में शनि बली होता है, समाज में वे वैचारिक रूप धरातल पर काम करने वाले होते हैं, जिस कारण उनकी समाज में स्वीकार्यता होती है।
क्या कहते हैं ज्योतिष विद्वान
पंडित पूर्णप्रकाश शर्मा शास्त्री का कहना है उपचुनाव की घोषणा के साथ-साथ प्रत्याशी ज्योतिषीय ग्रह स्थिति पर भी अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। ऐसे में इस बार जहां टिकट आवंटन में चंद्रमा की महत्वपूर्ण भूमिका है तो वहीं प्रत्याशियों की जीत में शनि ग्रह रोल अदा करेगा। चंद्रमा मन है तो टिकट लेने के मन में कोई संशय नहीं वहीं शनि जमीनी स्तर पर वास्तविक लड़ाई लड़ना है। ऐसे में दोनों ग्रहों की भूमिका इस उपचुनाव में महत्वपूर्ण रहने वाली है।
