“टापू”…निर्माणाधीन पुल का गिरता डंगा कैमरे में कैद ; सिविल इंजीनियरिंग पर सवाल

--Advertisement--

अनुसूचित जनजाति बस्ती को दो साल से है “सुख के समय” का इंतजार।

सिरमौर – नरेश कुमार राधे 

हिमाचल प्रदेश के नाहन विधानसभा क्षेत्र में एक पंचायत है ‘विक्रमबाग’। इस पंचायत में तकरीबन अढ़ाई सौ की आबादी वाली अनुसूचित जाति गांव ‘मंडेरवा’ में वास करती है।

क्या आप विश्वास करेंगे, मारंकडा नदी का जलस्तर बढ़ने पर ये गांव एक ‘टापू’ का रूप ले लेता है। मतलब, न कोई गांव में दाखिल हो सकता है और न ही कोई बाहर आ सकता है।

तकरीबन तीन साल पहले दलित बस्ती को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने के मकसद से 4 करोड़ रुपए की लागत से पुल के निर्माण का निर्णय हुआ। ये अलग बात है कि 6 महीने से निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।

शनिवार सुबह निर्माणाधीन पुल का डंगा (वायर क्रेट) ढह गया। गांववासी बखूबी जानते थे कि बरसात में ये गिरेगा ही।

लिहाजा, सुबह से जारी मूसलाधार बारिश में गांववासी विभाग की पोल खोलने के मकसद से तैयार बैठे थे, ताकि गिरते डंगे को कैमरे में कैद किया जा सके।

इसमें सफलता भी हासिल हुई है। सवाल गुणवत्ता के साथ-साथ सिविल इंजीनियरिंग पर भी उठा है।

ग्रामीणों की मानें तो पुल की ऊंचाई अधिक होने के कारण गांव की तरफ नीचे आने के लिए अपरोच सड़क के लिए ये डंगा लगाया गया था। इसको लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी कि ये कार्य ठीक नहीं है।

मूसलाधार बारिश जारी होने स्थिति में गांववासियों को अब ये भी आशंका है कि पुल की सामग्री भी पानी की भेंट चढ़ सकती है।

सवाल इस बात पर भी है कि जब बात लोक निर्माण विभाग के युवा मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अपने इलाके से जुड़ी हुई थी तो 6 दिन के भीतर ही ठियोग के नजदीक वैली ब्रिज तैयार कर दिया गया।

वहीं, अनुसूचित जाति का ये तबका दशकों से आदिवासियों की तरह जीवन जीने को विवश है तो उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।

विक्रमबाग पंचायत प्रधान नरेंद्र कुमार की मानें तो लोक निर्माण विभाग के मंत्री की हेल्पलाइन पर भी पुल के निर्माण में विलंब को लेकर शिकायत दर्ज करवाई गई थी, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

गांववासी इस बात को बखूबी जानते हैं कि अब विभाग बरसात का बहाना बना सकता है। लिहाजा, मौजूदा मानसून भी आफत में ही बीतेगा। गांववासियों की हालत देखकर आप सिहर हुए बिना भी नहीं रह सकते।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

कांगड़ा में जंगली जानवरों का कहर, 31 मेमनों को उतारा मौत के घाट; चरवाहों पर टूटा दुखों का पहाड़

हिमखबर डेस्क  हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के उपमंडल पालमपुर...

सुबह कमरे से नहीं निकला राहुल… जब दरवाजा खोला तो मंजर देख कांप गई रूह

हिमखबर डेस्क  पुलिस थाना भराड़ी के अंतर्गत आने वाली ग्राम...

प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश में धनराशि स्वीकृत

हिमखबर डेस्क  केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मन्त्री कमलेश पासवान ने...

पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार ने दी बड़ी राहत, 10 रुपए घटी एक्साइज ड्यूटी

हिमखबर डेस्क  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में...