ज्वाली में स्कूलों की आड़ में दुकानदारी चमका रहे निजी स्कूल

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हर साल वसूल रहे दाखिला फीस, स्कूलों में बेच रहे यूनिफार्म, टाई, बैल्ट तथा किताबें-कापियां-पेंसिल-रबड़-पैन

ज्वाली – अनिल छांगु

उपमंडल ज्वाली में निजी स्कूलों में लूट बदस्तूर जारी है। निजी स्कूलों में हर वर्ष मोटी दाखिला फीस वसूल की जा रही है तथा हर वर्ष मनमानी से महीना की फीस बढ़ा दी जाती है। स्कूलों में ही यूनिफार्म, टाई, बैल्ट तथा किताबें-कापियां-पेंसिल-रबड़-पैन इत्यादि बेचे जा रहे हैं लेकिन इनको रोकने वाला कोई नहीं है।

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल बोर्ड से मिलने बाली सस्ती किताबे पढ़ाने की बजाय सीबीएसई व आईसीएसई की महंगी किताबे पढा रहे है तथा अपनी मनमर्जी से प्राइवेट पब्लिशर की किताबों को मोटी कमीशन के चक्कर में निजी स्कूल लगवा रहे हैं।

अभिभावकों की जेबों पर निजी स्कूल डाका डाल रहे हैं लेकिन स्कूल शिक्षा बोर्ड आंखें मूंद कर बैठा है। आंगनवाड़ी में जाने की उम्र के बच्चों को निजी स्कूल प्री नर्सरी में दाखिला दे रहे हैं जिससे बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।

स्कूलों में बच्चों को न तो पीने के ठंडा पानी मिलता है तथा अन्य ही अन्य कोई सुविधा मिल पाती है। स्कूलों में अग्निशमन यंत्र भी नहीं हैं तथा निजी स्कूलों के भवन भी स्कूल मापदंडों पर खरा नहीं उतरते हैं।

हालांकि स्कूल का दोमंजिला भवन होने पर दोनों तरफ सीढियां होनी चाहिए तथा मंजिल पर पानी की टंकी होनी चाहिए तथा अग्निशमन यंत्र का होना भी अनिवार्य है परन्तु कोई भी नियम निजी स्कूल पूरा नहीं करते हैं। स्कूल भवन के कमरों में पर्याप्त पंखे तक नहीं हैं।

निजी स्कूल के स्टाफ का शोषण होता है जिसमें निर्धारित सेलरी तो कागजों में दर्शा दी जाती है लेकिन बाद में उनसे पैसे वापिस ले लिए जाते हैं और सेलरी रजिस्टर पर स्टाफ के हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। निजी स्कूल संचालक खुद लाखों का लाभ कमा रहे हैं जबकि स्टाफ का शोषण कर रहे हैं।

स्कूल बसों में नोसिखिए चालक रखे हुए हैं तथा परिचालक तो इन बसों में दिखाई ही नहीं देते हैं। इन निजी स्कूलों का शिक्षा विभाग द्वारा निरीक्षण भी नहीं किया जाता है।

बुद्धिजीवियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सूक्खु, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से मांग की है कि टीमों का गठन करके निजी स्कूलों का निरीक्षण करवाया जाए तथा जो स्कूल मापदंडों को दरकिनार कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

अभिभावकों का रोष

अभिभावक राकेश कुमार, संजीव, सतीश, प्रदीप, संगीता, सन्तोष, जनेश, सुरेश इत्यादि ने कहा कि निजी स्कूलों में उनके बच्चे पढ़ते हैं लेकिन हर साल निजी स्कूल दाखिला फीस मांगते हैं। अगर दाखिला फीस बारे पूछा जाता है तो जबाब मिलता है कि अगर आपने बच्चा पढ़ाना है तो दाखिला फीस देनी ही पड़ेगी अन्यथा आप अपने बच्चों को निकलवा लो। आईआरडीपी के बच्चों को भी रिलेक्सेशन नहीं दी जाती है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के बोल

इस बारे में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी चलने नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि टीमों का गठन करके निजी स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा और जो कोई निजी स्कूल मापदंडों पर खरा नहीं उतरा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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