जर्मनी के मेहमानों ने पसंद की हाथों से बनीं टोकरियां

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भटेड़-मसरूर में पहुंच कर समितियों से वनों के रखरखाव की हासिल की जानकारी

देहरा – शिव गुलेरिया

जर्मन से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने वन मंडल देहरा के तहत केएफडब्ल्यू प्रोजेक्ट के तहत वन समितियों द्वारा वनों के विकास में उत्कृष्ट कार्य का निरीक्षण करने के लिए भटेड़ व मसरूर में वनों पहुंच कर समितियों से वनों के रखरखाव की जानकारी हासिल की।

उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा वहां पर जो प्रदर्शनी लगाई थी, उसकी खूब सराहना की और इसे बहुत बड़ा रोजगार से जुड़ा मुद्दा बताया और कहा कि ऐसे कार्य करने से विकास भी होता है और अपने देश की पहचान बनती है और जो इस कार्य से जुड़े हैं उन्हें बधाई दी।

जर्मन से आई उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का जोरदार स्वागत भी किया गया और उन्हें विस्तार से वहां की समितियां द्वारा जो भी अपने हाथों से बनाए गए उत्पाद थे, उनकी प्रदर्शनी लगाई गई थी। उसके बारे में भी पूरी जानकारी दी गई। एक से एक सुंदर उत्पादन हाथों से बने हुए थे। झाडू, चटाई, टोकरी इत्यादि इसके अलावा विभिन्न विभिन्न जल स्रोतों को भी उन्होंने ध्यान से देखा।

कांगड़ा व चंबा में केएफडब्ल्यू प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीण वन प्रबंधन समितियां वनों की परिस्थितिक तंत्र व वनों में सुधार लाने पर कार्य कर रही हैं। जिस कारण पिछले पांच सालों में वनों का भरपूर विकास हुआ है। इसमें पौधरोपण क्षेत्र, भू-संरक्षण कार्य, जल संचयन प्रणाली आदि कार्यों की प्रतिनिधिमंडल ने सराहना की।

वन प्रबंधन समिति के सदस्यों ने वन विकास के लिए पौधारोपण क्षेत्रों में कई प्रकार की प्रजातियां जैसे आमला, बेहड़ा, शीशम, कचनार, अर्जुन, बांस, दरेक आदि पौधे लगाए गए हैं, जिससे आने वाले समय में परिस्थितिकी तंत्र को स्थिर रखने में सहायता मिल रही है। इनका निरीक्षण भी उच्च स्तरीय समूह द्वारा किया गया।

जर्मन के प्रतिनिधिमंडल ने वनों के विकास के साथ वनों की वेस्टेज से घरेलू उत्पादन कर आजीविका चलाने के लिए वन विकास प्रबंधन समितियों की सराहना की।

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर वन विभाग के मुख्य परियोजना निदेशक उपासना पटियाल, वन मंडल अधिकारी देहरा सन्नी वर्मा व प्रोजेक्ट के तहत कार्यरत अन्य अधिकारी व वन विभाग के कर्मचारियों सहित ग्रामीण प्रबंधन समितियों के सदस्य उपस्थित रहे।

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