देहरा – शिव गुलेरिया
वृक्ष हमेशा से ही मनुष्य के लिए अहम रहे हैं और हमारे बुजुर्गों को इस बात का पता है। प्राचीन काल से ही जलवायु परिवर्तन चिंता का विषय रहा है और हमारे ऋषि मुनि इस बात से अवगत थे।
वे हमेशा पानी, पृथ्वी व प्रकृति आदि की चिंता किया करते थे और इसी को लेकर उन्होंने ऐसे प्रावधान बनाए कि लोगों का वृक्षों एवं प्रकृति आदि के प्रति एक भाव पैदा हो। उन्हीं संस्कारों के चलते हमारे देश में नदी, पेड़ व पृथ्वी आदि को आज भी पूजा जाता है।
जसवां परागपुर प्रेस क्लब के प्रेस सचिव एवं शिव शक्ति युवा क्लब पुनणी के मीडिया प्रभारी शशि राणा ने कहा कि पौधारोपण के साथ-साथ वृक्षों की सुरक्षा की ओर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इस कार्य को लेकर सभी को जागरूक होना होगा।
जिस प्रकार से अपने परिवार और बच्चों की चिंता की जाती है। वैसे ही हम सभी को मिलकर वृक्षों की चिंता करनी होगी तभी जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को खत्म किया जा सकेगा। शशि राणा ने कहा कि अपने हाथों से लगाए हुए पेड़ जब बड़े हो जाते हैं। तब उनके पास जाकर बड़ा सुकून मिलता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में विकास के चलते प्रकृति के साथ संतुलन बिगड़ा है। विकास मानव के लिए जरूरी है लेकिन इसके साथ-साथ प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना उससे भी ज्यादा जरूरी है। पेड़ों की कटाई के कारण जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। वायु प्रदूषण दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
शशि राणा ने कहा कि बेशक वन विभाग द्वारा हर वर्ष प्रदेश में लाखों पौधे लगाए जाते हैं लेकिन अगर कुछ माह बाद उनकी स्थिति जांची जाए तो लगभग कुछेक प्रतिशत पौधे ही विकसित हो पाते हैं। ऐसे में इस व्यवस्था की ओर ध्यान देने की बहुत ज्यादा आवश्यकता है।
हम सभी को समझना होगा कि पेड़ लगाने तक सीमित रहने से जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण नहीं पाया जा सकता। पेड़ लगाने के बाद उसकी रक्षा भी हमें ही करनी होगी तभी पेड़ के विकसित होने के बाद उसका पूरा लाभ मनुष्य को मिल पाएगा।

