जगदेव हों या संतराम, निधन के बाद उपचुनाव में बेटों की हुई पराजय, पढ़ें अब तक हुए उपचुनाव के बारे में

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व्यूरो, रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश में अनलाक की आहट के साथ ही मंडी संसदीय क्षेत्र और दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। चाणक्य नीति कहती है कि राजनीति संवेदनहीन होती है। शायद पहाड़ के लोग भी मौके को देखते हुए व्यक्ति विशेष को भूलकर नए सिरे से इबारत लिखने में विश्वास रखते हैं।

यही कारण है कि जगदेव चंद हों या संतराम, इनके निधन के बाद उपचुनाव में जनता सहानुभूति में नहीं बही। स्व. जगदेव चंद भाजपा के नामचीन नेताओं में पहचान रखते थे। मगर उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे नरेंद्र ठाकुर चुनाव हार गए। उस समय अनीता वर्मा ने कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा और जीती थीं।

इसी तरह प. संतराम कांग्रेस में ऐसा नाम थे कि बैजनाथ के लोगों के लिए वही सब कुछ थे। वर्ष 1998 में संतराम के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे सुधीर शर्मा को पराजय का मुंह देखना पड़ा था। लोगों ने दूलो राम को जितवाकर विधानसभा भेजा था। सत्ता में रहते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व प्रेम कुमार धूमल किसी विधायक के निधन के बाद उपचुनाव जिताने में शत प्रतिशत सफल नहीं हो सके। लोगों ने संवेदनाओं में बहने की बजाय विवेक से जनप्रतिनिधि का चुनाव किया।

उपचुनाव में सत्तारूढ़ दल का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। इसका प्रमाण यह है कि वर्ष 2014 में कांग्रेस सत्ता में थी और निर्दलीय चुनाव जीतकर आए राजेंद्र राणा ने विधायक पद छोड़कर लोकसभा का चुनाव लड़ा। सुजानपुर से उनकी पत्नी अनीता राणा को कांग्रेस ने टिकट दिया। सुजानपुर की जनता ने अनीता राणा को पराजित करने के साथ हमीरपुर सीट से राजेंद्र राणा को भी हरा दिया।

वर्ष 2004 में वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे और लोकसभा चुनाव मैदान में वन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार को उतारा गया। उनकी जगह गुलेर सीट से चंद्र कुमार के पुत्र नीरज भारती ने चुनाव लड़ा और पराजय का मुंह देखना पड़ा था। वर्ष 1998 के दोनों उपचुनाव की बात की जाए तो धूमल के पहले कार्यकाल में परागपुर व बैजनाथ से भाजपा ने जीत दर्ज की थी।

वर्ष 2011 में नालागढ़ सीट से हरिनारायण सिंह सैणी के निधन के बाद उनकी पत्नी गुरनाम कौर हारीं। सिरमौर जिला के तहत आने वाले रेणुका विधानसभा क्षेत्र से दिग्गज कांग्रेस नेता डा. प्रेम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र विनय कुमार को हार का मुंह देखना पड़ा। यहां से प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़कर हिरदा राम भाजपा टिकट पर विधायक चुने गए थे।

प्रदेश में होंगे तीन उपचुनाव

हिमाचल प्रदेश में भाजपा सरकार के चौथे वर्ष के कार्यकाल में तीन उपचुनाव होंगे। विधायक सुजान ङ्क्षसह पठानिया के निधन के बाद फतेहपुर में, विधायक नरेंद्र बरागटा के निधन के बाद जुब्बल-कोटखाई में और सांसद रामस्वरूप शर्मा के निधन के बाद मंडी संसदीय सीट पर उपचुनाव होगा।

उपचुनाव का सूरत-ए-हाल

  • वर्ष,विधानसभा सीट,कौन थे विधायक,कौन जीता,दल
  • 1993,हमीरपुर,जगदेव चंद,अनीता वर्मा कांग्रेस
  • 1998,परागपुर,मास्टर वीरेंद्र,निर्मला देवी,भाजपा
  • 1998,बैजनाथ,प. संतराम,दूलो राम,भाजपा
  • 2004,गुलेर,प्रो. चंद्र कुमार,हरबंस सिंह राणा,भाजपा
  • 2011,रेणुका,प्रो. प्रेम सिंह,हिरदा राम,भाजपा
  • 2011,नालागढ़,स्व. हरि नारायण सिंह सैणी,लखविंद्र सिंह राणा,कांग्रेस
  • 2014,सुजानपुर,राजेंद्र राणा,नरेंद्र ठाकुर,भाजपा
  • 2017,मेवा,आइडी धीमान,डा. अनिल धीमान,भाजपा
  • 2019,पच्छाद,सुरेश कश्यप,रीना कश्यप,भाजपा
  • 2019,धर्मशाला,किशन कपूर,विशाल नैहरिया,भाजपा
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