
चम्बा- भूषण गुरुंग
एक ओर सरकार जहां एक कॉल पर एफआईआर दर्ज करती है तो वहीं चुवाड़ी थाना में छेड़छाड़ की शिकार हुई नाबालिग समेत परिजनों को रात 8 बजे से देर रात 3 बजे तक थाने में बिठाए रखा गया। पोक्सो जैसे कड़े तथा सख्त कानून में अगर पुलिस इस तरह से व्यवहार करती है तो फिर अन्य मामलों में कितनी तेजी से करती होगी। हालांकि कानून की बात करें तो पोक्सो एक्ट में रिपोर्ट लिखने से मना करने पर सम्बन्धित पुलिस अधिकारी तक पर मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। जांच में अगर आरोपों की पुष्टि होती है तो पुलिस पर भी मामले में गाज गिर सकती है।
जिला के पुलिस थाना चुवाड़ी में छेड़छाड़ की शिकायत लेकर पहुंची नाबालिग तथा उसकी मां से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। सम्बन्धित अधिकारियों को जानकारी देने के बाद अब महिला, अतिरिक्त दंडाधिकारी (ADM) चंबा के पास पहुंची।
शिकायत के अनुसार थाना प्रभारी चुवाड़ी ने न सिर्फ शिकायत पत्र फाड़ दिया बल्कि ढुलमुल कारवाई करते हुए देर रात तक महिला तथा अन्य को थाने बिठाए रखा। 2 बार लिखे शिकायत पत्र को फ़ाड़ कर पुलिस ने अपने ढंग से शिकायत पत्र पीड़ित युवती से लिखवाया। हालांकि शिकायतकर्ता के अनुसार एसएचओ तथा जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ताओं को धमकाने की लगातार कोशिश की तथा गलत शब्दों का प्रयोग किया।
एसएचओ ने कहा कि थाना उसका है तथा वह किसी को भी यहां से निकाल सकता है तो वहीं एक अन्य ने पीड़ित नाबालिग को धमकाते हुए कहा कि वो उसको ही अंदर कर देता अगर वो नाबालिग नहीं होती। कुल मिलाकर इस सारे मामले में पुलिस की कथित कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। उधर एडीएम अमित मेहरा ने मामले की जांच करवाने का भरोसा पीड़ित के परिजनों को दिया है।
उधर एसएचओ रमन चौधरी ने आरोपों से इंकार करते हुए कानून के तहत कार्रवाई करने की बात कही। वहीं उन्होने कहा कि आरोपी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है तथा आरोपी ने भी दूसरे पक्ष पर मारपीट के आरोप लगाए हैं।
लिहाज़ा अब देखना यह है कि जिला प्रशासन समेत पुलिस के आला अधिकारियों को शिकायत करने के बाद मामले पर क्या कार्रवाई होती है ताकि आम लोगों का विश्वास पुलिस पर बना रहे।
