चल बसे पिता…बीच रास्‍ते मिली खबर, HRTC चालक ने पहले सवारियों को छोड़ा; फिर घर जाकर किया अंतिम संस्‍कार

--Advertisement--

सिरमौर – नरेश कुमार राधे

हिमाचल पथ परिवहन निगम के चालक परिचालक विषम परिस्थितियों में भी अपनी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। ऐसा ही एक मामला एचआरटीसी नाहन डिपो में सामने आया है। जब लॉन्ग रूट पर जा रहे एक चालक को बीच रास्ते में ही पिता की मृत्यु का समाचार मिला। तो चालक ने सवारियों से भरी बस को उनके गंतव्य तक पहुंचाया। उसके बाद घर पहुंच कर इकलौते बेटे ने पिता का अंतिम संस्कार किया।

हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस नाहन से कुहट रूट पर जा रहे बस चालक कमल ठाकुर को ददाहु में पिता की मृत्यु का समाचार मिला। फिर भी चालक ने बस को 100 किलोमीटर दूर रोनहाट पहुंचा, वहां से बस की सवारियों को दूसरी बस में शिफ्ट करवा कर, चालक घर पहुंच कर इकलौते बेटे का फर्ज निभाकर पिता का अंतिम संस्कार किया।

वीरवार सुबह सवारियों से भरी बस को लेकर चालक कमल ठाकुर नाहन से कुहट के लिए चला था, तो सब कुछ रोजमर्रा की तरह सामान्य था। मगर रास्ते में घर से लगातार फोन आ रहे थे, मगर ड्राइव करते हुए फोन पर बात नहीं हो सकती थी। इसलिए ददाहु बस स्टैंड पहुंचने पर बस को रोकने के बाद वापिस घर फोन किया।

फोन पर दिल को झकझोरने वाला समाचार मिला कि उनके पिता की आकस्मात मृत्यु हो गई है। जिसके बाद चालक कमल ठाकुर की आंखों में आंसू थे और दिल में पिता को हमेशा के लिए खो देने की अथाह पीढ़ा। बस के परिचालक सचिन कुमार ने तुरंत निजी टैक्सी वाले को बुलाया और कमल ठाकुर को सरकारी बस वहीं छोड़कर टैक्सी से तुरंत घर जाने की बात कही।

मगर सामने खड़ी निजी टैक्सी में बैठने से ठीक पहले अचानक कमल ने पीछे मुड़कर बस की तरफ देखा, तो बस बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य सवारियों से पूरी भरी हुई थी। ददाहु बस अड्डे पर चालक की व्यवस्था न होने पर कमल ठाकुर ने अपने आंसू पोंछे और परिचालक से कहा कि बस में बैठे ये सभी लोग भी किसी न मजबूरी और जरूरी काम से ही कहीं न कहीं जा रहे होगे। सभी सवरियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के बाद ही पिता का अंतिम संस्कार करूंगा।

इस बात को सुनने के बाद परिचालक की आंखें भी नम हो गई और कमल की तरफ देखकर बोला, आपके परिवार वाले और रिश्तेदार घर में आपका इंतजार कर रहे होगे। आप परिवार के इकलौते बेटे है, इसलिए आपका जल्दी घर पहुंचना बहुत जरूरी है। कमल ने जवाब दिया कि शायद हमें मालूम न हो, मगर इन सवारियों की मजबूरियां और पीड़ा मुझसे भी ज्यादा बड़ी हो सकती है।

पिता ने मुझे हमेशा एक बात बड़ा जोर देकर कही थी की बेटा परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, मगर कभी भी किसी मुसाफिर को आधे रास्ते में मत छोड़ना। क्योंकि ना जाने कौन मुसाफिर किस परेशानी और दर्द से गुजर रहा हो, ये किसको मालूम।

ये सुनने के बाद कंडक्टर ने भी भीगी आंखों के साथ सीटी बजाई और चालक कमल ठाकुर बस को ददाहु से 100 किलोमीटर दूर बस को रोनहाट पहुंचाया, बस में शेष रही कुछ सवरियों को दूसरी बस में शिफ्ट करवा कर कुहट तक पहुंचाया गया।

वहीं से अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए रोनहाट स्थित अपने घर चले गए। इसी बस में सवार एक व्यक्ति बड़े गौर से चालक और परिचालक की सभी बातचीत को सुन रहा था और मन ही मन पूरे रास्ते भर ये सोच रहा था की अगर वो चालक की जगह होता, तो शायद इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाता।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

इनसाफ जीता, बदले की भावना से की गई कार्रवाई और सरकार की तानाशाही हारी: जयराम

हिमखबर डेस्क पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने व्यवस्था...

निकाय व पंचायत चुनाव से पहले सियासत तेज: कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को बताया निराधार

हिमखबर डेस्क प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा है...

कुल्लू में टेलर की बदतमीजी पर भारी हंगामा, कपड़ों का नाप देने गई युवती से किया अभद्र व्यवहार

हिमखबर डेस्क हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में एक टेलर द्वारा...