चंडीगढ़ में रोकी गई एचआरटीसी की दो रात्रि बसें, फिर पनपा विवाद, यात्री हुए परेशान

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शिमला – नितिश पठानियां

केंद्र शासित चंडीगढ़ में एक बार फिर हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की दो बसों पर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने कार्रवाई की है।

मिली जानकारी के मुताबिक रामपुर से दिल्ली जा रही शिमला डिपू (3) की बस (HP 63 C-4795) व मनाली से दिल्ली जा रही मंडी डिपो की बस (HP 65-9238) को जब्त कर लिया गया है। बीती रात चंडीगढ़ के सेक्टर 17 बस स्टैंड अड्डा द्वारा यह कार्रवाई की गई।

बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग के दबाव में निगम की बसों पर फिर से कार्रवाई शुरू कर दी गई है। तकरीबन 6 महीने पहले भी इसी तरह का एक विवाद पनपा था।

इसमें यहां तक बात हो गई थी कि चंडीगढ़ के सेक्टर 43 के बस स्टैंड को छोड़कर मोहाली (पंजाब) शिफ्ट कर लिया जाए, जहां न केवल किराए में कटौती होगी बल्कि हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम को करोड़ों रुपए का मुनाफा भी होगा। लेकिन बाद में चंडीगढ़ में ही सेक्टर 43 के बस स्टैंड को जारी रखने का फैसला लिया गया।

यह भी जानकारी मिली है कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग हिमाचल में नए रूट चलाना चाहती है। इसके काउंटर साइन को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।

बैठक में संवाद होना चाहिए था, मगर ऐसा नहीं किया जा रहा है। रात के समय बसों को जब्त करने की कार्रवाई को भी अनुचित माना जा रहा है।

बड़ी बात यह है कि बीती रात 9:30 बजे यह कार्रवाई की गई और इस कारण ठंड के मौसम में बसों में रात्रि सेवा में सफर कर रहे यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। निगम की बसों पर आरोप लगाया गया कि वह बिना परमिट के चल रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक सवाल यह भी है कि जब यह बसें बिना परमिट के चल रही थी तो इन्हें 6 महीने से क्यों नहीं रोका गया।

अंदर खाते निगम के कर्मचारियों का यह भी कहना है कि बसों के रोड परमिट व अन्य औपचारिकताएं पूरी है। बावजूद इसके CTU के दबाव में कार्रवाई की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक चंडीगढ़ से रोजाना अप डाउन में निगम की 410 के आस-पास बसें चंडीगढ़ से गुजरती हैं। इससे चंडीगढ़ को भी काफी फायदा होता है। क्योंकि न केवल निगम की बसों से मोटी राशि वसूली जाती है बल्कि बस स्टैंड पर दुकानों का किराया भी चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा ही लिया जाता है। ये दुकानें निगम की बसों में सफर करने वाले यात्रियों से ही आमदनी होती है।

चंडीगढ़ में ट्रांसपोर्ट विभाग के इस तरह के रवैये ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम प्रबंधन को यह सोचने पर विवश कर दिया है कि क्यों न चंडीगढ़ के सेक्टर 43 को छोड़कर मोहाली शिफ्ट कर लिया जाए। यहां से निगम की बसों को संचालित करना आसान भी है। साथ ही पार्किंग शुल्क पर खर्च की जाने वाली करोड़ों रुपए की राशि में भी कटौती होगी।

निगम प्रबंध निदेशक रोहन चंद ठाकुर के बोल

इसी बीच निगम के प्रबंध निदेशक रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि चंडीगढ़ के ट्रांसपोर्ट सचिव अजय चगती से सुबह मामला उठाया गया है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि बगैर संवाद के इस तरह की कार्रवाई सही नहीं है। उन्होंने कहा कि चंद घंटो में बसों को रिलीज़ नहीं किया गया तो अगले स्तर पर मामला उठाया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि 6 महीने पहले भी इस मामले पर खास विवाद पैदा हुआ था। इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने बैक फुट पर आकर हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की बस को बंद कर दिया था।

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