गोरख धंदा: टांडा अस्पताल में सरकारी टेस्ट की सुविधा होने के बावजूद लैब का नाम लिखकर बाहर भेजे जा रहे मरीज

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हिमखबर – डेस्क

डाक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल में मरीजों को सरकारी टेस्ट की सुविधा होने के बावजूद टांडा बाजार में स्थित एक निजी प्राइवेट लैब में पर्ची पर लैब का नाम मार्क करके टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है।

प्रदेश के दूसरे बड़े अस्पताल टांडा में जब सरकारी लैब में टेस्ट की सुविधाएं हैं तो फिर गरीब मरीजों को प्राइवेट लैब क्यों भेजा जा रहा है। सभी टेस्टों की मशीनें क्यों उपलब्ध नहीं हैं यह गौर करने की बात है। इतने बड़े अस्पताल के होने के बावजूद मरीजों को टेस्ट करवाने के लिए एक चिन्हित लैब के भरोसे रहना पड़ रहा है।

एक तरफ यह कहा जाता है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज व टेस्ट की सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। शुक्रवार को एक मरीज को टेस्ट की पर्ची पर एक निजी लैब का नाम मार्क करके भेजा गया। हालांकि टांडा बाजार में अन्य कई प्राइवेट लैब उपल्ब्ध हैं परंतु एक निजी लैब का नाम क्यों मार्क किया गया, यह विचारणीय है।

टांडा अस्पताल के एक रेजिडेंट डाक्टर ने पर्ची पर उस प्राइवेट लैब को मार्क कर लैब से टेस्ट करवाने को कहा, जबकि इस टेस्ट की सुविधा अन्य प्राइवेट लैबों में भी उपलब्ध है। फिर गरीब मरीजों को प्राइवेट लैब में क्यों भेज रहे है। सरकारी अस्पतालों में अब सभी टेस्ट की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

टांडा अस्पताल के पास एक निजी प्राइवेट लैब में मरीजों को मोटी फीस टेस्टों की देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं। ऐसे में गरीब मरीजों को भारी दिक्कतों को झेलना पड़ रहा हैं।

प्रदेश के सात जिलों चंबा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, कुल्लू, बिलासपुर व कांगडा के करीब 30 लाख से अधिक की आबादी टांडा अस्पताल में उपचार के लिए आती हैं।

अब ऐसे में आधे लोगों के टेस्ट भी अगर एक निजी प्राइवेट लैब में किए जाते होंगे तो इनकी इनकम का अंदाजा इससे लगाया ही जा सकता है।

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