सोलन – रजनीश ठाकुर
गुरु नाम के जपने मात्र से ही शिष्यों के अनेक जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह शब्द कुनिहार के ऊंचा गांव मे श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन कथा वाचक नरेंद्र भारद्वाज ने कही गुरु भक्ति ही श्रेष्ठ तीर्थ स्थान है। गुरु की तपस्या से ब्रह्मा आदि देवता भी तृप्त हो जाते हैं।
वेद और शास्त्रों के अनुसार विशेष रूप से गुरु की भक्ति करने से शिष्य घोर पापों से भी मुक्त हो जाता है इसीलिए सभी को श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए.
वहीं उन्होंने अगले प्रसंग में श्री कृष्ण के बचपन के सखा सुदामा भक्त की कथा सुनाते हुए कहा कि एक दिन सुदामा भक्त की धर्मपत्नी सुशीला ने सुदामा को कृष्ण भगवान से मिलने के लिए विवश कर दिया और सुशीला नगर के 5 घरों से चावल मांग कर लाई सुदामा भक्त चावल की गठरी झोली में डालकर कृष्ण से मिलने निकल पड़े ।
जब सुदामा भक्त कृष्ण नगरी पहुंचे तो कृष्ण के अंग रक्षकों ने महल के गेट पर रोक दिया,द्वारकाधीश को जब उनके अंगरक्षक ने सूचना दी कि कोई वृद्ध ब्राह्मण नंगे पाव व फटे पुराने कपड़ों में अपने आप को आपका मित्र सुदामा बता रहा है और आपसे मिलने आया है तो कृष्ण भगवान सुदामा का नाम सुनते ही दौड़े दौड़े खुद सुदामा को लाने महल के द्वार पर पोहच गये महल में श्री कृष्ण व रुक्मणि ने सुदामा की खूब आदर खातिर की।
एक दिन सुदामा भक्त ने कृष्ण जी से घर वापसी की जिज्ञासा की तो कृष्ण भगवान ने सुदामा भक्त से कहा कि मांगो क्या मांगना चाहते हो सुदामा भक्त ने कुछ नहीं मांगा ।
कृष्ण भगवान ने सुदामा भगत की गरीबी हालत देखकर तुरंत विश्वकर्मा को बुलाकर कहा कि जिस प्रकार हमारी नगरी है उसी प्रकार सुदामा की नगरी का निर्माण करो सुदामा जब अपनी नगरी पहुंचा तो वहां अपनी नगरी को ही नहीं पहचान सका और सुदामा की पत्नी सुशीला गहने और सुंदर वस्त्रों को पहने थी उसे भी सुदामा नहीं पहचान सके इस तरह कथा के कई अन्य प्रसंग भी कथा वाचक ने श्रोताओं को सुनाए।
इस मौके पर मंडप आचार्य कामेश्वर शर्मा, अनोखी राम, प्रद्युमन शर्मा, राकेश शर्मा व आशीष वशिष्ठ सहित कथा में कुनिहार के समीप लगते गांव के सैंकड़ों भक्तजन कथा का रसपान कर अंत में भंडारे का आनंद लिया।