हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में अब टू और फोर व्हीलर वाहनों की खरीद-फरोख्त के दौरान रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) का स्थानांतरण एक महत्त्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया बना दी गई है, जिसे मूल मालिक को अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। अगर वाहन की बिक्री के बाद भी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का स्थानांतरण नहीं किया जाता, तो इसे कानूनी उल्लंघन माना जाएगा। इसके लिए मूल मालिक को सिविल और आपराधिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।
मोटर व्हीकल एक्ट में यह साफ तौर पर कहा गया है कि यदि वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट समय पर स्थानांतरित नहीं किया जाता, तो मूल मालिक को कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा। यह कदम प्रशासन ने इसलिए उठाया है, ताकि वाहन के मालिकों को कानूनी मामलों में आसानी हो और किसी भी दुर्घटना या विवाद के दौरान जिम्मेदारी सही मालिक पर हो।
अगर ऐसा नहीं किया जाता और किसी दुर्घटना या कानूनी मामले में गाड़ी का नाम सही मालिक से संबंधित नहीं पाया जाता, तो बड़ी कानूनी समस्या बन सकती है। कई बार ऐसा देखने को मिला है कि गाड़ी को बेचने वाला मूल मालिक गाड़ी को दूसरे व्यक्ति को बेचने के बाद रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का स्थानांतरण नहीं करवाता है।
और जब गाड़ी किसी दुर्घटना या विवाद में फंसती है, तो संबंधित नोटिस मूल मालिक को भेजे जाते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का स्थानांतरण अब मूल मालिक के लिए अनिवार्य कर दिया है। ऐसा न करने पर मालिक को कानूनी और वित्तीय दंड भुगतना पड़ सकता है।

