
कांगड़ा – राजीव जसवाल
डॉक्टर राजेंद प्रसाद आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा को नेफरोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा मिल गई है। लगभग 10 सालों से नेफरोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर का पद खाली चल रहा था । लंबे इंतजार के बाद किडनी के मरीजों को ये सुविधा मिल पाई है।
अन्यथा किडनी से संबंधित मरीजों को चंडीगढ़ या दिल्ली का रुख करना पड़ता था और मरीजों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। परन्त अब नेफरोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा टांडा अस्पताल में मिल जाएगी मरीजों को अब ना तो चडीगढ़ का सफर तय करना पड़ेगा न ही परेशानियों को झेलना पड़ेगा।
टांडा अस्पताल में दस साल बाद ये सुविधा मुहैया हुई है । नेफरोलॉजी हेड ऑफ डिपार्टमेंट विशेषज्ञ डॉक्टर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर अभिनव राणा ने मरीजों का उपचार शुरू कर दिया हैं। हिमाचल में अभी तक केवल तीन ही नेफरोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर हैं ।
एक डॉक्टर अभिनव राणा व अन्य दो डॉक्टर एम्स बिलासपुर में सेवाएं दे रहे हैं। सात जिलों जिसमें सबसे अधिक आबादी लगभग 15 लाख वाले जिला कांगडा के साथ चंबा, हमीरपुर, ऊना, मंडी, कुल्लू को टांडा अस्पताल में अब नेफरोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा मिलेगी।
किडनी से संबंधित मरीजों को नेफरोलॉजी वशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा सप्ताह के दो दिन बुधवार व शुक्रवार को मिलेगी। डॉक्टर अभिनव राणा ने बताया की मरीज अगर समय पर किडनी का चेकअप करवा ले तो किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है।
मधुमह व हाई ब्लड प्रेशर लोगों के किडनी के खराब होने के ज्यादा चांस होते हैं । अगर इन्हें समय रहते कंट्रोल कर लिया जाए तो काफी हद तक किडनी को खराब होने से ज्यादा बचाया जा सकता है। इसके साथ किडनी बायऐपसी की सुविधा भी पूरे हिमाचल में केवल टांडा अस्पताल में ही उपलब्ध है।
टांडा अस्पताल में अभी तक 6 किडनी बायऐपसी 15 से अधिक केथेटर डाले जा चुके हैं। इसके साथ टांडा अस्पताल इस साल ही 30 मार्च से डायलेसिस यूनिट की भी स्थापना हो चुकी है।
टांडा अस्पताल में डायलासिस की 9 मशीनों पर प्रतिदिन 30 से अधिक व पूरे महीने में 700 से 900 से अधिक मरीजों के डायलेसिस किए जा रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट भी अस्पताल में किए जा रहे हैं।
