खामेनेई की मौत के बाद पेज़ेशकियान सहित तीन लोगों की परिषद संभालेंगी ईरान की बागडोर

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हिमखबर डेस्क

ईरान की राजधानी तेहरान पर शनिवार तड़के हुए अमरीका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई। ईरानी मीडिया ने इसकी पुष्टि की। इन हमलों में खामेनेई के सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) कमांडर मोहम्मद पाकपुर भी मारे गए।

ईरान में खामेनेई की मौत के बाद 40 दिन की शोक अवधि का ऐलान किया गया है। स्थानीय मीडिया का कहना है कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन परिषद के एक अन्य न्यायाधीश कुछ समय के लिए देश की बागडोर संभालेंगे।

खामेनेई की बेटी, दामाद और नाती भी हमलों में मारे गईं। फ़ार्स समाचार एजेंसी ने कहा, “सर्वोच्च नेता के घर में जानकार सूत्रों से संपर्क स्थापित करने के बाद,उनकी बेटी, दामाद और नाती की मौत की खबर की दुर्भाग्यवश पुष्टि हो गयी है।” यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि खामेनेई की तीन बेटियों में से कौन मृतकों में शामिल है।

ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि खामेनेई की मौत उत्तरी तेहरान के इलाकों को निशाना बनाकर किये गये हमलों में हुई। इनमें उनके परिसर और कार्यालयों के पास के स्थान भी शामिल हैं। अर्ध-सरकारी तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया कि शेमिरान में राष्ट्रपति भवन के पास और सर्वोच्च नेता के आवास के नजदीक कई मिसाइलें गिरीं।

फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि राजधानी पर हुए हमलों के दौरान खामेनेई “अपने घर में मौजूद कार्यालय में अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए शहीद हुए।” बाद में सरकारी टेलीविजन ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की। अमेरिकी मीडिया ने इजरायली सूत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि शनिवार के हमलों 40 ईरानी अधिकारियों की मौत हुई है, हालांकि ईरान की ओर से ऐसी कोई पुष्टि नहीं की गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में श्री खामेनेई की मौत की पुष्टि की। ट्रंप ने लिखा, “इतिहास के सबसे क्रूर लोगों में से एक खामेनेई की मौत हो गयी है। यह न केवल ईरान के लोगों के लिए न्याय है, बल्कि सभी महान अमेरिकियों और दुनिया भर के उन कई देशों के लोगों के लिए भी न्याय है।” उन्होंने कहा कि यह अभियान ईरानी लोगों के लिए अपने देश की सत्ता वापस लेने का मौका है।

दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने रविवार को चेतावनी दी कि अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमलों में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की शहादत के बाद, इस्लामी गणराज्य के सशस्त्र बलों द्वारा “इतिहास में सबसे भीषण आक्रामक अभियान” जल्द ही शुरू किये जायेंगे।

आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “ईरान के सशस्त्र बलों द्वारा अमेरिकी आतंकवादियों के कब्जे वाले क्षेत्रों और ठिकानों की ओर इतिहास के सबसे भीषण आक्रामक अभियान जल्द ही शुरू किए जाएंगे।” ईरान सरकार ने इस हत्या को “एक बड़ा अपराध” बताया, जो “इस्लामी दुनिया के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।”

ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा संस्था, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एसएनएससी) ने कहा कि संयुक्त हमले “दुनिया के उत्पीड़कों के खिलाफ लड़ाई में एक बड़े विद्रोह की शुरुआत करेंगे।” उन्होंने ईरान और उसके सहयोगियों को “अधिक लचीला और दृढ़” बनकर उभरने का आश्वासन दिया।

धमकियों के कुछ ही घंटों के भीतर, इजरायली अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों ने मध्य तेल अवीव पर हमला किया। पूरे शहर में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं और आपातकालीन सेवाओं ने कई प्रभावित स्थलों पर प्रतिक्रिया दी।

खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता होने के साथ-साथ सैन्य प्रमुख भी थे। उन्होंने इस्लामी गणराज्य के संस्थापक रुहोल्लाह खुमैनी का स्थान लिया था। सर्वोच्च नेता के रूप में उनके पास ईरान की सरकार, सशस्त्र बलों और न्यायपालिका पर अंतिम अधिकार था और वे देश के सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकारी भी थे। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान, 86 वर्षीय खामेनेई ने पश्चिम के साथ ईरान के तनावपूर्ण संबंधों की देखरेख की, व्यापक प्रतिबंधों, घरेलू अशांति और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बार-बार हुए गतिरोध का सामना किया।

इससे पूर्व, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान में कहा था, “आज सुबह हमने तानाशाह खामेनेई के परिसर को नष्ट कर दिया। अब इस तानाशाह का शासन समाप्त हो गया है।” उन्होंने कहा कि इजरायली सेना ने “अयातुल्ला शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भी मार गिराया है” और आने वाले दिनों में और हमले करने का वादा किया। श्री नेतन्याहू ने ईरानियों से “शासन को उखाड़ फेंकने और अपने भविष्य को सुरक्षित करने” का आह्वान किया।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी की सुबह ईरान के खिलाफ एक बड़ा, समन्वित सैन्य हमला किया, जिसमें तेहरान, क़ोम, इस्फाहान, करमानशाह और कराज सहित देश भर के कई शहरों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में ईरान के होर्मोज़गान प्रांत में बालिकाओं के एक प्राथमिक स्कूल पर हमला भी शामिल है, जिसमें स्कूली छात्राओं सहित 148 लोगों की मौत हुई। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हमले में 95 लोग घायल भी हो गये।

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