
बिलासपुर- सुभाष चंदेल
केज में ट्राउटपालन का ट्रायल सफल रहने के बाद अब कोलडैम में रेनबो ट्राउट का उत्पादन बड़े स्तर पर करने की तैयारी है। इसके तहत विभाग ने इस बार दस हजार मछली बीज डाला है। ट्रायल में विभाग की ओर से अढ़ाई मीट्रिक टन ट्राउट सेल की गई। हालांकि कोरोना संकट के बीच सेल में भी दिक्कतें आई, लेकिन विभाग ने इससे पार पाते हुए अब बिलासपुर में ट्राउट का जायका बढ़ाने के लिए कोलडैम में प्रोडक्शन के लिए योजनावद्ध ढंग से काम शुरू कर दिया है।
कोलडैम में पहली मर्तबा किए गए सफल प्रयोग के तहत तैयार की गई ठंडे इलाकों में पलने वाली रेनबो ट्राउट के विक्रय को लेकर कोरोना संकट के बीच रेट डाउन करने पड़े। ट्राउट का रेट पहले 550 रुपए और फिर 450 रुपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया, लेकिन बात न बनने पर 350 रुपए प्रतिकिलोग्राम रेट तय कर ट्राउट की सेल करनी पड़ी।
अब हालात सामान्य हैं और विभाग ने ट्रायल सक्सेस रहने के चलते बड़े स्तर पर ट्राउट उत्पादन की योजना बनाई है जिसके तहत इस बार अभी तक दस हजार मछली बीज डाला जा चुका है। ऐसे में ठंडे इलाकों में पलने वाली रेनबो ट्राउट प्रजाति की मछली अब बिलासपुर जिला के कोलडैम में भी तैयार होगी। पहली बार विभाग ने कोलडैम में 24 केज में ट्राउट का सफल प्रयोग किया है।
छह मीट्रिक टन मछली की पैदावार दर्ज की गई और आने वाले समय में कोलडैम में बड़े स्तर पर ट्राउट मछली की पैदावार करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। उधर, विभाग के डायरेक्टर सतपाल मेहता ने बताया कि कोलडैम में ट्रायल सफल रहने के बाद अब आगे से निरंतर उत्पादन किया जाएगा।
इस बार अभी तक दस हजार मछली बीज डाला जा चुका है। हालांकि कोरोना संकट के बीच हिमाचल का मछली कारोबार प्रभावित हुआ था। अब हालात सामान्य होने के चलते कोलडैम में ट्राउट का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जाएगा।
मनरेगा के साथ लिंक होंगी विभागीय योजनाएं
ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोडऩे के लिए विभागीय योजनाओं को मनरेगा के साथ लिंक किया जाएगा। यदि युवा मत्स्यपालन के लिए आगे आते हैं उन्हें फ्री में तालाब और रेस-वे बनाकर उपलब्ध करवाए जाएंगे। यही नहीं, सीड और फीड भी अनुदान पर दी जाएगी। सरकार बेरोजगारों को घरद्वार पर ही स्वरोजगार से जोडऩे को लेकर हरसंभव प्रयास कर रही है।
