
ज्वाली, माधवी पंडित
कृषि विभाग के “कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण” द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी उत्कृष्ट कृषक को पुरस्कार वितरित किए गए। यह पुरस्कार उन कृषकों को दिए जाते हैं जो पशुपालन, बागवानी एवं कृषि के क्षेत्र में बहुत ही सराहनीय कार्य करते हैं उन्हीं को यह पुरस्कार देकर सरकार सम्मानित करती है।
इसी बीच हाल ही में ज्वाली उपमंडल के अंतर्गत टयूकरी गांव से सम्बन्ध रखने वाले सुभाष शास्त्री को धीरा में अध्यक्ष विपिन सिंह परमार द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं दस हजार की धनराशि देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सुभाष शास्त्री का कहना है कि मैंने इन पौधों को बच्चों की तरह पाला है बागवानी लगाने का मेरा बहुत ही पुराना सपना थ आज से लगभग सात-आठ साल पहले मैं शास्त्री के पद से सेवानिवृत्त हुआ था मुझे बागवानी का बहुत ही शौक है जिस कारण मैंने सेवानिवृत्त होने के बाद कृषि विभाग के माध्यम से लगभग 70 पौधे सेब के लगाए और मेरी इस बागवानी में हर एक तरह के पौधे हैं।
जैसे सेब, अनार, संतरा,अमरूद, लीची, बादाम, आम, चीकू, बड़ी इलायची, छोटी इलायची इत्यादि अनेक प्रकार के और भी पौधे हैं जिनमें से सेब के लगभग 70 पौधे लगाए गए हैं जो कि 4 साल बाद फल देने लग पड़े हैरानी की बात तो यह है कि सेब के पौधे ठंड के पहाड़ी क्षेत्रों में ही पाए जाते हैं परंतु वही पौधे मैदानी इलाके में लगा कर फल तैयार करना एक अपने ही आप में अलग बात है।
सुभाष शास्त्री अपना यह सारा श्रेय कृषि विभाग एवं प्रदेश सरकार को देते हैं जिनकी प्रेरणा से आज वह अपने इस बागवानी के सपने को साकार करते हुए नजर आ रहे हैं सुभाष शास्त्री ने मीडिया के माध्यम से कृषि विभाग एवं प्रदेश सरकार का आभार प्रकट किया है ।
