कांगड़ा : चौधरी बिरादरी के दबदबे वाली सीट पर BJP को इस बार जीत की आस

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शिमला, 08 अक्तूबर – नितिश पठानियां

कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र ओबीसी बाहुल्य होने के चलते यहां 1977 के बाद से लगातर चौधरी बिरादरी का उम्मीदवार विधायक बनता आ रहा है। इस विस क्षेत्र में  कई दफा जनता ने पार्टी लाइन से उठकर कैंडिडेट की व्यक्तिगत छवि को देखकर उम्मीदवार को चुना है। जिसका उदाहरण संजय चौधरी को बसपा के टिकट पर जनता ने जीताकर विधानसभा भेजा।

वहीं 2012 में पवन काजल निर्दलीय जीत कर विधानसभा पहुंचे। कांगड़ा में चौधरी विद्यासागर ने भाजपा के टिकट पर तीन लगातार चुनाव जीते। वह प्रदेश की कैबिनेट में मंत्री भी रहे। उनके बाद कांगड़ा हल्के से किसी को भी मंत्री पद नहीं मिल पाया।
1998 के बाद यहां से भाजपा का उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया है। इसका सबसे बड़ा कारण भाजपा में भितरघात व आपसी फूट रही है। इस बार भाजपा मंडल के विरोध के बावजूद पवन काजल को भाजपा में शामिल कर हाईकमान कांगड़ा सीट को हर हाल में अपनी झोली में डालना चाहती है।
मगर पवन काजल की जैसे ही भाजपा में एंट्री हुई पूर्व विधायक सुरेंद्र काकू  कांग्रेस में चले गए। वह पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे।
इसी तरह 2007 में चौधरी बिरादरी का एक और बसपा के टिकट पर जीता नेता संजय चौधरी भी पवन काजल के भाजपा में आने से ऊहापोह की स्थिति में है। अभी तक उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया है।  वहीं सुरेंद्र काकू कांग्रेस में अपना टिकट पक्का मानकर चुनाव प्रचार में जुट गए है।
चौधरी बिरादरी के सभी नेता अपने अपने राजनीतिक अस्तित्व कीजंग लड़ रहे है। यदि भाजपा की आपसी फूट यहां समाप्त नहीं हुई तो वर्षों से इस सीट को जीतने से चूक रही पार्टी को कहीं इस दफा भी मन-मसोस कर न रहना पड़ जाए।
पवन काजल के आने से भाजपा को पूरे कांगड़ा जिला में चौधरी बिरादरी का वोट हासिल हो सकता है मगर काजल की अपनी सीट पर मंडल के आवला पार्टी में जबरदस्त अंतर्विरोध की स्थिति है।
कांगड़ा का किला वही फतह कर पाएगा जो पार्टी के भितरघात को मैनेज कर पाएगा। चौधरी बिरादरी के अलावा अन्य बिरादरियों का वोट जो प्रत्याशी हासिल कर पाएगा उसके जीतने की संभावना अधिक होगी।
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