कांगड़ा पर सिर्फ एक बार रहा महिला का कब्जा, कांग्रेस ने तीन बार महिला को दिया टिकट, बीजेपी ने

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लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने तीन बार महिला को दिया टिकट, बीजेपी ने एक बार भी नहीं खेला दांव

हिमखबर डेस्क

कांगड़ा में लोकसभा चुनावों में मात्र एक बार ही 1984 में महिला सांसद के हाथों में जनता ने कमान सौंपी है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस ने तीन बार महिला उम्मीदवार को टिकट सौंपा है, जबकि बीजेपी ने एक बार भी महिला उम्मीदवार पर दांव नहीं खेला है।

वहीं, अब तक कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी ने कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र से तीन बार चुनाव लड़ा, जिसमें 1984 में एक बार विजयी रही हैं। चंद्रेश कुमारी के अलावा वर्ष 1971 से 2019 तक के आम चुनावों में अन्य राजनीतिक दलों ने महिलाओं पर विश्वास कम जताया है, जबकि दो महिला उम्मीदवारों ने आजाद के रूप में मैदान में उतरने का दम दिखाया था। हालांकि अब केंद्र सरकार की ओर से 33 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है।

हालांकि इससे प्रावधानों को जनगणना के बाद ही लागू किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में इस बार कांगड़ा-चंबा में यह देखना अहम होगा कि राजनीतिक दल किसे अपना उम्मीदवार बनाते हैं और क्या जनता भी महिलाओं पर विश्वास जिताकर संसद भेजती है या नहीं? कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट में अब तक हुए चुनावों में अधिकतर पार्टियों ने पुरुष उम्मीदवारों पर ही भरोसा जताया है।

कांगड़ा से कब-किस महिला ने लड़ा चुनाव

वर्ष 1984 में पहली बार कांग्रेस की ओर से महिला उम्मीदवार के रूप में चंद्रेश कुमारी कटोच मैदान में उतरी थीं और पहले ही चुनाव में विजेता बनी थीं। इसके बाद लगातार उन्होंने दो बार चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार झेलनी पड़ी थी।

चंद्रेश कुमारी को वर्ष 1989 में भाजपा के शांता कुमार से और 1991 में बीजेपी के ही डीडी खनौरिया से हार झेलनी पड़ी थी।

इसके बाद 1996 के आम चुनावों में निर्मला देवी आजाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरीं, वहीं 2009 के चुनावों में निर्मला शर्मा भी आजाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरीं, जबकि इसके बाद 2014 में आरती सोनी शिवसेना व प्रवेश यादव समाजवादी पार्टी के रूप में चुनाव में उतरीं।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में मात्र एक महिला उम्मीदवार निशा कटोच मैदान में उतरीं, लेकिन इन सभी उम्मीदवारों को जनता का आशिर्वाद नहीं मिल पाया। इन सब महिला नेताओं में मात्र एक ही बार 1984 में चंद्रेश कुमारी कटोच को ही कांगड़ा-चंबा की जनता ने चुनकर दिल्ली भेजा था।

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