कलयुग की मां यशोदा, लावारिस शवों का करती हैं अंतिम संस्कार

--Advertisement--

मंडी जिला के धर्मपुर की बेटी दिल्ली में अब तक कर चुकी हैं लगभग 4000 लाशों का अंतिम संस्कार

मंडी – नरेश कुमार

यशोदा मां का वह रूप जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की परविरिश की। जन्म तो भगवान श्रीकृष्ण को मां देवकी ने दिया पर उनका लालन-पालन मां यशोदा ने किया था। यह तो बात द्वापर युग की है पर कलयुग में भी एक मां है और उनका नाम भी यशोदा है।

इस मां का काम लावारिस शवों का दाह संस्कार करना है। कलियुग में जब अपने कई बार मुंह फेर देते हैं तो यह मां यशोदा सबसे आगे आती हैं और ऐसे लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए उनका अंतिम संस्कार करती हैं।

यशोदा प्रदेश के जिला मंडी के धर्मपुर तहसील की रहने वाली हैं। वह देश की राजधानी दिल्ली में रहती हैं और वहां पर समाजसेवा में जुटी हुई हैं। अपने काम के सिलसिले में यशोदा मोहाली पहुंची हुई थीं।

यशोदा बताती हैं कि वह प्रदेश के छोटे से कोने मंडी धर्मपुर के ब्रांग चनोता गांव से हैं। वह राजधानी दिल्ली में रहने के लिए लगभग 25 साल पहले गईं, वहां पर वह पिछले 19 सालों से ऐसे लोगों के काम आ रही हैं।

यशोदा बताती हैं कि लावारिश शवों का संस्कार करने का निर्णय लेने का काम मुश्किल था पर देखा कि इन लोगों को कौन मुक्ति दिलाएगा तो उन्होंने एक सामाजिक संस्था का गठन किया और फिर अपने अभियान को आगे बढ़ाया।

यशोदा बताती हैं कि उन्होंने पिछले 19 सालों में लगभग 4000 लावारिस शवों का संस्कार किया है। यही नहीं वह अस्थियों का हरिद्वार में विसर्जन भी करती हैं। शुरू में उनके इस काम को लेकर रिश्तेदारों, लोगों से काफी सुनना भी पड़ा पर अब लोग उनके इस काम को लेकर सराहना करते हैं।

यशोदा पर बनी है शॉर्ट फिल्म

यशोदा पर एक शॉर्ट फिल्म भी बनी है। इस फिल्म को कई फिल्म फेस्टिवल में दिखाया भी जा रहा है। फिल्म में यशोदा के लावारिस शवों का संस्कार करने की कहानी दिखाई गई है। यह शॉर्ट फिल्म कई पुरस्कार भी जीत चुकी है।

यही नहीं यशोदा की सामाजिक सेवा के लिए दिल्ली सरकार से लेकर कई अन्य सामाजिक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित भी किया है। यशोदा बताती हैं कि जब आपके काम को सराहना मिलती है तो आप आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

कोरोना में दिखा अपनों का अलग ही रंग

यशोदा बताती हैं कि वह ऐसी मृत देहों का संस्कार करती हैं, जिनका कोई नहीं होता है पर कोरोना के इस दौर में इनसान का एक और रंग देखने को मिला है।

वह बताती हैं कि कोरोना में उन्होंने ऐसे शवों का संस्कार करने का बीड़ा भी उठाया, जिनके सब सामने थे पर कोई भी आगे नहीं आया। जब वह कोरोना संक्रमित लोगों का संस्कार करने में जुटी थीं तो उनके परिवार वाले भी एक समय में डर रहे थे कि कहीं उन्हें कुछ हो न जाए पर भगवान उनके साथ हैं और वह अपने काम में जुटी हुई हैं।

 

--Advertisement--
--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

शातिरों के जाल में फंसा व्यक्ति, APK फाइल पर क्लिक करते ही हजाराें रुपए का लग गया चूना

हिमखबर डेस्क  साइबर थाना नोर्थ जोन धर्मशाला के तहत ऑनलाइन...