करोड़ों की लागत से संवर रहा भोरंज का सम्मू ताल

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पहले बन चुका था दलदल, लेकिन अब सभी कह रहे ‘वाह सम्मू ताल’, यहीं पर 3.30 करोड़ रुपये की लागत से बस स्टैंड का भी हो रहा है निर्माण

हिमखबर डेस्क

कई दशकों से उपेक्षित पड़े और दलदल में तबदील हो चुके भोरंज के ऐतिहासिक सम्मू ताल के अब दिन फिरने लगे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अनुकंपा और विधायक सुरेश कुमार के प्रयासों से सम्मू ताल सजने-संवरने लगा है।

जी हां, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐतिहासिक सम्मू ताल के संरक्षण, संवर्द्धन और सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग के माध्यम से दो करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बजट का प्रावधान होते ही इसका कार्य भी आरंभ कर दिया गया है और अब यह ऐतिहासिक ताल एक सुंदर आकार लेने लगा है। दलदल की जगह अब एक सुंदर एवं निर्मल सरोवर को देखकर लोग इसकी खूब तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल, कई दशकों से लगातार उपेक्षा के कारण सम्मू ताल धीरे-धीरे दलदल में तबदील हो गया और लगभग लुप्त होने के कगार पर पहुंच गया था। लेकिन, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ भोरंज में सुरेश कुमार विधायक बनें तो उन्होंने इस ताल के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करके इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का संकल्प लिया।

विधायक के इस संकल्प को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपना भरपूर आशीर्वाद दिया और सम्मू ताल के लिए पर्यटन विभाग के माध्यम से दो करोड़ रुपये का प्रावधान किया।

मुख्यमंत्री के इस निर्णय से अब सम्मू ताल की कायाकल्प हो रही है और वह दिन दूर नहीं, जब यह ताल एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट एवं पर्यटक स्थल के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा।

सम्मू ताल के साथ ही मुख्यमंत्री ने एक अन्य विकासात्मक प्रोजेक्ट का कार्य भी आरंभ करवाया है। यहां लगभग 3 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से आधुनिक बस अड्डे का निर्माण किया जा रहा है। भोरंज में कई दशकों से एक अदद बस अड्डे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, लेकिन यह प्रोजेक्ट कभी भी धरातल पर नहीं उतर पाया।

भोरंज में इस बहुप्रतिक्षित प्रोजेक्ट को क्रियान्वित करने के लिए भी मुख्यमंत्री ने बजट का प्रावधान किया और आज सम्मू ताल के पास ही एक आधुनिक बस अड्डे का निर्माण कार्य भी चल रहा है।

कुल मिलाकर, सम्मू ताल में इन दोनों विकासात्मक परियोजनाओं पर लगभग 5 करोड़ 30 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं और यह स्थान अब अपनी एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर हो रहा है।

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