
नई दिल्ली, इस्लामाबाद – व्यूरो रिपोर्ट
कंगाली के समंदर में गोते खा रही पाकिस्तान की अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नुस्खे काम नहीं कर रहे हैं। ऊपर से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से भी उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है।
चूंकि पाकिस्तान के पास सिर्फ 18 दिन के गुजारे लायक ही धन बचा है। ऐसे में शहबाज शरीफ को उन सब बातों को मानने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है, जिसकी किसी भी राजनेता ने कल्पना नहीं की होगी।
दरअसल, आईएमएफ यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान पर शर्त लगा दी है कि मुल्क के सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आना होगा, उनसे सलाह-मश्विरा करने के बाद ही वह कोई फैसला लेंगे।
ऐसे में शहबाज शरीफ सभी राजनीतिक पार्टियों को इकट्ठा करने का प्रयास कर रहे हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष शीघ्र ही पाकिस्तान को कर्ज नहीं देता है तो दिक्कतें बेहद बढ़ जाएंगी।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को कहा कि इस समय हमारी आर्थिक चुनौती अकल्पनीय है। हमें जिन शर्तों को पूरा करना है, वे कल्पना से परे हैं। हालांकि देश के पास शर्तों को लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
उधर, आरिफ हबीब लिमिटेड के अनुसार 27 जनवरी तक देश का भंडार 3.09 अरब डॉलर के बेहद निचले स्तर तक गिर गया है, जो केवल 18 दिनों के आयात को कवर कर सकता है।
आईएमएफ समीक्षा को पूरा करने से न केवल 1.12 बिलियन का संवितरण होगा, बल्कि मित्र देशों और अन्य बहुपक्षीय उधारदाताओं से अंतर्वाह भी अनलॉक होगा।
