हिमखबर डेस्क
आज के समय में अपनी व्यस्त दिनचर्या में हम अपने शरीर को स्वस्थ रखना जैसे भूल सा गए है, जिससे आए दिन हम भयंकर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हल्की बीमारियां होने पर भी हम घरेलू नुस्खों के बजाए अंग्रेजी दवाइयों का इस्तेमाल करते है, जबकि हमारे आस-पास के वातावरण में ऐसे कई तरह के पेड़-पौधे व जड़ी बूटियां मौजूद है जिनसे हम इन बिमारियों से निजात पा सकते है।
ऐसा ही एक पेड़ है जिसकी फूल, फल, पत्तियों और छाल से कई तरह की घातक बिमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। जिसका नाम है अर्जुन का वृक्ष इस वृक्ष में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते है। इसके फल, फूल, पत्ते व छाल हमें स्वस्थ रखने में लाभकारी है।
इसका इस्तेमाल कई तरह की आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में भी किया जाता है। खास बात यह कि यह पेड़ आपको हर जगह मिल जाएगा। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में भी ये पेड़ पाया जाता है। इस पेड़ का इस्तेमाल आज भी यहां के लोग औषधीय रूप में करते है।
अर्जुन का पेड़ एक औषधीय वृक्ष है, जिसकी ऊंचाई लगभग 60 से 80 फ़ीट है। अर्जुन शब्द का संस्कृत में अर्थ स्वच्छ अथवा साफ़ है। पेड़ की छाल वाले हिस्से का रंग सफ़ेद होता है इसलिए इसे अर्जुन का वृक्ष कहा जाता है। यह पेड़ हिमालय के तराई व शुष्क पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है।
इसकी छाल का उपयोग कई आयुर्वेदिक दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी छाल बाहर से सफेद अंदर से चिकनी व मोटी होती है। इसकी छाल पेड़ से उतार लेने पर फिर उग आती है। इसके पत्ते अमरूद के पत्तों जैसे 7 से 20 सेंटीमीटर लंबे आयताकार होते हैं और कहीं-कहीं नुकीले भी होते हैं। किनारे सरल तथा कहीं-कहीं सूक्ष्म दांतों वाले होते हैं।
वसंत में नए पत्ते आते हैं और छोटी-छोटी टहनियों पर लगे होते हैं। ऊपरी भाग चिकना व निचला शिरायुक्त होता है। फल सफेद या पीले मंजरियों में लगे होते हैं। इनमें हल्की सी सुगंध भी होती है। फल लंबे अण्डाकार 5 या 7 धारियों वाले जेठ से श्रावण मास के बीच लगते हैं व शीतकाल में पकते हैं। 2 से 5 सेंटीमीटर लंबे ये फल कच्ची अवस्था में हरे-पीले तथा पकने पर भूरे-लाल रंग के हो जाते हैं। फलों की गंध अरुचिकर व स्वाद कसौला होता है। फल ही अर्जुन का बीज है।
अर्जुन के वृक्ष के उपयोगी भाग
अर्जुन के वृक्ष का तना, फूल, पत्तियां, फल व जड़ कई तरह की औषधीय दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है। अर्जुन वृक्ष एक सदाबहार व हरा-भरा वृक्ष है, जिसका इस्तेमाल कई तरह की दवाइयों में किया जाता है। इसे औषधीय वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इसका इस्तेमाल हृदय रोग को दूर करने के लिए प्राचीन काल से ही किया जा रहा है। अर्जुन वृक्ष के छाल से चूर्ण, काढ़ा आदि बनाया जाता है।
औषधीय गुणों से भरपूर है वृक्ष
अर्जुन वृक्ष का नाम प्रमुख औषधीय वृक्षों में है। इसका इस्तेमाल ह्रदय रोग में प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। अर्जुन की छाल वृक्ष का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें कई तरह के औषधीय गुण है। इससे कई तरह की बीमारियों से निजात पाया जा सकता है।
यह किडनी और लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाकर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। अर्जुन की छाल में ट्राइटरपेनॉइड नाम का रसायन पाया जाता है, जो हार्ट संबंधित रोगों को दूर करने में सहायक है। इसके लिए अर्जुन की चाय भी बनाकर पी जा सकती है। अर्जुन की छाल में मुख्य घटक जैसे बीटा साइटोस्टेरॉल, अर्जुनिक अम्ल तथा फ्रीडेलीन पाए जाते हैं।
अर्जुनिक अम्ल ग्लूकोज के साथ एक ग्लूकोसाइड बनाता है, जिसे अर्जुनेटिक कहा जाता है। अर्जुन का पेड़ बेहद उपयोगी है। आयुर्वेद में इस पेड़ की छाल का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। खासकर डायबिटीज, गले की खराश, सर्दी-जुकाम, इन्फेक्शन, संक्रमण आदि शारीरिक समस्याओं का इलाज करने में अर्जुन के पेड़ की छाल काफी कारगर है।
अर्जुन वृक्ष के छाल से चूर्ण, काढ़ा, अरिष्ट आदि बनाया जाता है। यह उच्च रक्तचाप को कम करने, बालों के विकास, खांसी, मोटापा दूर करने, शुगर लेवल में करने, त्वचा व मुंह के छालों के उपचार में सहायक होता है। आयुर्वेद में इसकी बहुत सी दवाई उपलब्ध है।

