
धर्मशाला, राजीव जस्वाल
कोरोना महामारी के कारण हिमाचल सरकार ने इस बार दसवीं के विद्यार्थियों को प्रमोट कर जमा एक कक्षा में बिठाने का निर्णय लिया है। सरकार के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने भी बच्चों को प्रमोट करने के लिए प्रारूप तैयार कर लिया है।
शिक्षक संघों एवं शिक्षाविदों के सुझावों के अनुरूप तैयार हो रहे प्रारूप के अनुसार दसवीं में राज्य मुक्त विद्यालय के तहत पेपर देने वाले सभी बच्चों को प्रमोट नहीं किया जाएगा। एसओएस के तहत केवल उन्हें परीक्षार्थियों को प्रमोट किया जाएगा, जिन्होंने दो या तीन पेपरों में री-अपीयर भरा है।
जिन बच्चों ने पहली बार पंजीकरण करवाया है उन्हें प्रमोट करने का कोई आधार नहीं है इसलिए उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी। इस पर सभी शिक्षक संघों ने सहमति जताई है। नियमित बच्चों के लिए प्री-बोर्ड परीक्षा को आधार रखा है। नियमित छात्रों के लिए प्री-बोर्ड परीक्षा परिणाम के अधिकतम 45 अंक तय किए हैं, जबकि फर्स्ट व सेकेंड टर्म परीक्षा के 15-15 अंक रखे हैं। निर्धारित अंकों के आधार पर ही परिणाम तय किया जाएगा।
जिन बच्चों ने प्री-बोर्ड समेत कोई भी परीक्षा नहीं दी है, ऐसे परीक्षार्थियों से कारण जानने के बाद ही उन्हें प्रमोट करने का फैसला लिया जाएगा। इस बार यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि इस साल मेधावी बच्चों की मेरिट सूची बोर्ड जारी नहीं करेगा। इस बार दसवीं के नियमित 1,16,954 और 14,931 परीक्षार्थी एसओएस के तहत परीक्षा देने के लिए पंजीकृत हुए हैं। बोर्ड की ओर से तैयार किए गए प्रारूप को स्वीकृति के लिए प्रदेश सरकार के पास भेजा जाएगा।
शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष ने शिक्षक संघों से की बैठक
दसवीं के बच्चों को प्रमोट करने बाबत बोर्ड अध्यक्ष डा. सुरेश कुमार सोनी व सचिव अक्षय सूद ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अध्यापक संघों के सदस्यों से चर्चा की। बैठक में हेडमास्टर काडर ऑफिसर्स एसोसिएशन से ध्रुव पटियाल और विजय गौतम, साइंस टीचर एसोसिएशन के नरेंद्र ठाकुर, सीएंडवी अध्यापक यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष चमन लाल तथा घनश्याम दास ने सुझाव दिए। सभी की राय थी कि नियमित परीक्षार्थियों को फर्स्ट व सेकेंड टर्म तथा प्री बोर्ड व इंटरनल असेस्मेंट के आधार पर अंक आवंटित करने के लिए प्रक्रिया अपनाई जाए।
