
पिछले तेहरा वर्षो से यही गल्ती कर वनवास का दंश झेल रही है भाजपा
फतेहपुर – अनिल शर्मा
जब जब फतेहपुर विधानसभा मे भाजपा पार्टी बाहरी व्यक्ति को फतेहपुर मे अपना प्रत्याशी बना कर मैदान मे उतारती रही है तब तब भाजपा को फतेहपुर मे हार का सामना ही करना पड़ा है । जिसका ग्बाह खुद इतिहास रहा है । और भाजपा की यही गल्ती फतेहपुर विधानसभा मे पिछले 13 सालो से वनवास का कारण बनी हुई है ।
मगर पिछली वार से हुई हारो से भी भाजपा पार्टी ने सबक नही लिया और इस बार फिर फतेहपुर विधानसभा मे बाहरी चेहरा उतार दिया है । इस बार भाजपा पार्टी ने नूरपुर के विधायक एवं वन मंत्री राकेश पठानियां को मैदान मे उतारा है । अगर हम इतिहास पर जाए तो 2012 मे चुनाव के परिणामों की घोषणा 20 दिसम्बर 2012 को की गई।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में 68 सीटों हेतु मतदान हुआ था कांग्रेस ने 36 सीटों पर जीत दर्ज की, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 26 सीटों पर जीत मिली, जबकि निर्दलीय 5 सीटों पर और हिमाचल लोकहित कांग्रेस 1 सीट पर विजयी रही। मगर तब भाजपा ने फतेहपुर से बलदेव ठाकुर को अपना प्रत्याशी बनाया था जिस पर वाहरी दूत होने का अरोप था बलदेव ठाकुर जवाली विधानसभा के भोल पंचायत से सम्बन्ध रखते है ।
उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रत्याशी स्वर्गीय सुजान सिंह पठानियां से हुआ था और वो बलदेव ठाकुर स्वर्गीय सुजान सिंह पठानियां से हार गये थे । फिर विधानसभा चुनाब नम्बर 2017 मे हुए फिर भाजपा ने मौजूदा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाल परमार को मैदान मे उतारा टिकट मिलते ही उनका भी बाहरी दूत होने के नाम पर विरोध हुआ और भाजपा के बलदेव ठाकुर आजद रुप चूनाबो मे कुद गये ।
परमार का मुकाबला स्वर्गीय सुजान सिंह पठानियां से हुआ सुजान सिंह पठानियां उस समय बीमार चल रहे थे मगर घर बैठे ही 1274 मतो से पठानियां चुनाव जीत गये । इसी तरहा 2021 मे फतेहपुर मे उप चूनाब हुए और भाजपा ने फिर बलदेव ठाकुर को मैदान मे उतारा फिर उनके वीरोध मे वाहरी दूत होने के पोस्टर लगे और विरोध हुआ और वो हार गये ।
अब फिर 2022 मे भाजपा ने नूरपुर विधानसभा से राकॆश पठानियां को मैदान मे उतारा है। जिनका भी फतेहपुर भाजपाई विरोध कर रहे है कुछ खुले मंच से तो कुछ अन्दर खाते से विरोध कर रहे है अब देखना है कि इस बार जनता अपना क्या फैसला देती है ।
