आपदा की घड़ी में माफिया ने ऐसी लूट मचाई की रातोंरात लाखों घन फीट रेत बजरी और पत्थर गायब हो गए। लूटने वालों को सत्ताधारी दल के कई नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त था। प्रशासन चाह कर भी लूट को नहीं रोक पाया। मुफ्त के माल को लूटने की ऐसी होड़ मोच कि कई जगह तो ठेकेदार आपस में भिड़ गए।
मंडी- अजय सूर्या
ब्यास नदी में पिछले दिनों आया जलप्रलय मनाली से मंडी तक सैकड़ों लोगों के घर और जिंदगी भर की कमाई अपने साथ बहा ले गया था। तबाही के अलावा नदी संपदा के रूप में करोड़ों रुपये का रेत बजरी और पत्थर साथ लेकर आई थी।
मनाली से मंडी तक जगह जगह रेत बजरी और पत्थर के ढेर लगे हुए थे। माफिया इस पर अपनी नजर लगाए बैठा था। सड़क मार्ग बहाल और नदी का जलस्तर कम होने के इंतजार में था।
रातोंरात गायब रेत-बजरी
आपदा की घड़ी में माफिया ने ऐसी लूट मचाई की रातोंरात लाखों घन फीट रेत बजरी और पत्थर गायब हो गए। लूटने वालों को सत्ताधारी दल के कई नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त था। प्रशासन चाह कर भी लूट को नहीं रोक पाया। मुफ्त के माल को लूटने की ऐसी होड़ मोच कि कई जगह तो ठेकेदार आपस में भिड़ गए। नौ जुलाई को आई बाढ़ से ब्यास नदी के किनारों पर रेत बजरी के जगह जगह अंबार लग गए थे।
पावर हाउस में लाखों घन फीट रेत बजरी घुसा था
राज्य विद्युत परिषद के 126 मेगावाट क्षमता के लारजी पनविद्युत प्रोजेक्ट के पावर हाउस में लाखों घन फीट रेत बजरी घुस गया था। प्रबंधन ने पावर हाउस की सफाई की तो बाहर रेत बजरी के ढेर लग गए। माफिया उसे भी लूट ले गया। लूट का माल किसको अधिक मिले सत्ताधारी दल के कई नेताओं ने पुलिस और प्रशासन पर इसके लिए दबाव बनाया। माफिया ने रेत बजरी और पत्थर बेच करोड़ों रुपये कमा लिए।
आपदा प्रभावितों को नहीं मिली फूटी कौड़ी
सरकार और आपदा प्रभावितों को एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। सरकार अगर थोड़ी सी गंभीरता दिखाई तो यही रेत बजरी और पत्थर प्रभावितों के घर बनाने या मरम्मत करने के काम आ सकता था। सरकार सड़कों की मरम्मत में भी इसका प्रयोग कर सकती थी।
करोड़ों रुपये की संपदा जब लूट गई तो शुक्रवार को खनन विभाग के अधिकारियों ने औपचारिकता पूरी करने के लिए थलौट,लारजी और औट आदि क्षेत्र में दबिश दी,लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा।
बिंदिया, जिला खनन अधिकारी मंडी के बोल
ब्यास नदी के किनारे पड़ा रेत बजरी और पत्थर चोरी करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। कई जगह दबिश दी गई है।

