
फतेहपुर,ज्वाली :- अनिल शर्मा,माधवी पण्डित
दो महीने के बाद 16 अगस्त सोमवार को सुबह पौंग झील से राहु, सिंघाड़ा, कतला तथा महाशेर प्रजातियों की मछली खाने वाले शौकीनों को पौंग झील की स्वादिष्ट मछली का स्वाद फिर से मिलना शुरू हो गया है ।
पौंग झील में सबसे अधिक सिंघाड़ा मछली का उत्पादन होता है । इस वार भी सिंघाड़ा फिश भारी मात्रा मे फिश लैंडिंग सेन्टरो मे पंहुची है । आज से मत्स्य आखेट पर दो महीने का लगा प्रतिबंध हट गया है । पौंग बांध की 15 सहकारी सभाओं मे आज करीब एक टन मछली पंहुचने का अनुमान है।
पंजीकृत शिकारी मछली का शिकार कर सहकारी सभाओ मे ठकेदरो के पास यह मछली बेचते है ठेकेदारो के माध्यम से यह फिश देश व प्रदेश की अलग अलग फिश मार्किटो मे पंहुचती है । इसी के साथ देश व प्रदेश मे तवा फिश के नाम से मशहूर हुई खटियाड़ तवा फिश मार्किट की रोनक भी आज से फिर से लोट आएगी ।
हिमाचल प्रदेश मत्स्य विभाग के पौंग बांध मे तैनात फिशरी अफसर पंकज पटियाल ने वताया की करोना काल व बंद सीजन के बाद आज फिश मार्किट मे पंहुच चुकी है । पौंग बांध की मछली स्वादिष्ट होने के कारण इसके दाम भी शिकारियों को अच्छे मिलते है । इस वार भी सिंघेडा़ फिश रिकोर्ड तोड़ मार्किट मे पंहुची है ।
उन्होंने बताया कि इस बार पौंग झील में 30 लाख रुपए का मछली का बीज डाला जाएगा जबकि पूरे प्रदेश की झीलों में 65 लाख रुपए से अधिक मछली के बीज डालने का लक्ष्य रखा है।
