आइजीएमसी शिमला व टांडा मेडिकल कालेज में ओपीडी में वापिस लौटेंगे रेजिडेंट डाक्टर, 7 दिन के लिए टाला आंदोलन

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शिमला-जसपाल ठाकुर

नीट पीजी की काउंसलिंग को लेकर 4 दिनों से हड़ताल पर गए आइजीएमसी शिमला व टांडा मेडिकल कालेज के रेजिडेंट डाक्टर शुक्रवार से ओपीडी में लौट आएंगे। फेडरेशन आफ रेजिडेंट डाक्टर के आह्वान पर 16 दिसंबर तक हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है। इस अवधि के भीतर यदि पीजी नीट की काउंसिंग की डेट तय नहीं होती तो डाक्टर दोबारा से हड़ताल पर जाएंगे। आइजीएमसी की रेजिडेंट डाक्टर एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डा. मनोज मेहतान व टांडा के डा अंकुर गौतम ने इसकी जानकारी दी। उन्‍होंने ने बताया कि केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के आश्‍वासन पर ये निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि नीट पीजी की काउंसलिंग में देरी को लेकर 6 दिसंबर से दो घंटों के लिए हड़ताल शुरू की थी। बुधवार को दिनभर रेजिडेंट डाक्टर हड़ताल पर रहें। उन्होंने कहा कि गृहमंत्रालय और पीएमओ के साथ फेडरेशन इस मुद्दें को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ भी लगातार बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि पीजी काउंसलिंग न होने अस्पतालों में डाक्टरों की भारी कमी हो रही है। रेजिडेंट डाक्टर मांग कर रहे हैं कि पीजी की काउंसलिंग जल्द शुरू की जाए।

रेजिडेंट डाक्टरों की हड़ताल वीरवार को भी जारी रही। डाक्टरों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई रही। रेजिडेंट डाक्टर न तो वरिष्ठ डाक्टरों के साथ वार्डों में राउंड पर गए न ही ओपीडी में मरीजों को चैक किया। ओपीडी में केवल वरिष्ठ डाक्टर ही कार्यरत थे। दिनभर डाक्टरों की हड़ताल का असर दिखा। दूर दराज क्षेत्रों से इलाज करवाने आए मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई मरीज करसोग, सिरमौर रामपुर, किन्नौर सहित कई क्षेत्रों से मरीज सुबह 6 बजे ही अस्पताल पहुंच गए थे ताकि समय पर वह अपना चैकअप करवाकर वापिस लौट सके।
ओपीडी में डाक्टर कम होने से उनका नंबर ही नहीं आया। रेजिडेंट डाक्टरों की हड़ताल का खासा असर देखने को मिला।
डा. मनोज ने बताया कि इस साल जनवरी माह में जो पीजी नीट की काउंसिलिंग होनी थी वह नहीं हो पाई है। अप्रैल में देशभर के चिकित्सा संस्थानों में नया बैच बैठना था वह मौजूदा केंद्र सरकार नहीं बिठा पाई है। इसके चलते हजारों नए डाक्टरों की पढ़ाई रुक गई है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ कोरोना के नए वैरियंट आ रहे हैं दूसरी तरफ सरकार डाक्टरों की अनदेखी कर रही है। जिसके चलते पुराने दो पीजी बैचों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा ही रहा तो रेजिडेंट डाक्टर पर मानसिक दबाब बहुत पड़ेगा जिससे कई डाक्टर मानसिक शिकार होकर कोई गलत कदम उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि देशभर के अधिकतर रेजिडेंट डाक्टर इस एक मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। उन्होंने बताया कि अकेले आइजीएमसी अस्पताल में 125 नए डाक्टरों की कमी है जिसे जल्द पूरा किया जाए।
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