अहंकार का त्याग ही शांति : डॉ योगेंद्र वर्मा

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शाहपुर – अमित शर्मा

द्रोणाचार्य स्नातकोत्तर शिक्षा महाविद्यालय रैत में वैश्विक परिदृश्य के लिए मानवीय मूल्य और मानवीय खुशी के लिए एक सेमिनार आयोजित किया गया इसमें प्रोफेसर योगिंदर वर्मा सत्य साईं सेवा संगठन मुख्यातिथि के रूप में रहे.

वहीं आलोक शर्मा प्रोफेसर हिमाचल प्रदेश कृषि विश्विद्यालय पालमपुर और डॉ अजय लखनपाल प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला ने रिसोर्स पर्सन के रूप में शिरकत की.

कार्यक्रम की शुरुआत माता सरस्वती के सामने दीप प्रज्वलन कर शुरू कर की गई. सबसे पहले महाविद्यालय के कार्यकारी निदेशक बीएस पठानिया ने सभी आए हुए अतिथियों का स्वागत किया.

इसके बाद रिसोर्स पर्सन आलोक शर्मा प्रोफेसर हिमाचल प्रदेश कृषि विश्विद्यालय पालमपुर ने प्रशिक्षु छात्रों को मानवीय मूल्यों के बारे में बताते हुए किया कि मूल्य शब्द ही अपने आप में महत्त्वपूर्ण शब्द है। मूल्यवान एवं मूल्यहीन होना ही प्रत्येक वस्तु की उपयोगिता एवं उपयोगहीनता को सिद्ध करता है।

मानवीय मूल्यों के महत्त्व को प्रत्येक अवस्था में स्वीकार किया जाता है। मूल्य हीनता की स्थिति सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक असन्तुलन की सूचना देती है तथा मूल्य विकास की स्थिति सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक विकास को सूचित करती है। अत: मूल्य का महत्त्व प्रत्येक क्षेत्र में स्वीकार किया जाता है।

मूल्यों के महत्त्व को किसी भी स्तर पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। मूल्य ही वह महत्त्वपूर्ण तथ्य है, जोकि समाज, संस्कृति एवं राष्ट्र के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है। मूल्य के अभाव में कोई भी विचार एवं वस्तु समाजोपयोगी एवं राष्ट्रोपयोगी नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा बचपन में बच्चों को प्रेम से बंचित नही रखना है ओर उनकी ऊर्जा का सदुपयोग करना है वहीं गायत्री मन्त्र से खुद को साधा जा सकता है उन्होंने व्हाट्सएप और टीवी की ज्यादा ना देखने की सलाह दी.

इसके बाद डॉ अजय लखनपाल प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला ने मूल्यों के बारे में बताया कि नई शिक्षा नीति के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि सत्य साईं इंस्टिट्यूट ने कहा कि हम विवेकानंद तैयार करेंगे ।उन्होंने कहा कि यूनेस्को पूछता है: क्या हम शांति सिखाने पर पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं? क्या हमारे स्कूल वास्तव में एक शांतिपूर्ण युवा पीढ़ी के निर्माण में रुचि रखते हैं?

और टिप्पणी: जो लोग ‘युद्ध’ (उपभोक्तावाद, हिंसा, ड्रग्स, कम सुख और मनोरंजन) चाहते हैं, वे युवाओं को युद्ध के लिए तैयार करते हैं; लेकिन जो लोग शांति चाहते हैं उन्होंने शांति के लिए युवाओं को प्रशिक्षण देने की उपेक्षा की है।मूल्य आधारित शिक्षा को लागू करना हमारी आधुनिक चुनौती है और धर्मों के लिए राष्ट्र की भलाई के लिए प्रबुद्ध नागरिक बनाने के लिए शिक्षाविदों के साथ मिलकर काम करने की क्षमता दिखाने का एक अवसर है।

इसके पश्चात कुंदन शर्मा स्टेट कोर्डिनेटर सर्विसेस पूर्व मुख्य प्रवन्धक हिमाचल प्रदेश वैन विभाग निगम ने सत्य साईं बाबा के बारे में बताया इसके बाद मुख्ययातिथि ने कहा कि भगवान से हम माँगते है पर बदले में हमे खुशी देनी है उन्होंने साईं के जीवन और उनके चमत्कारों के बारे में बताया ।

उन्होंने कहा कि अहंकार का त्याग ही शांति है और प्यार को भगवान का रूप मानना है । आत्मा को पहचाना है तभी व्यक्ति सही में मानव है ।अंत में बच्चों ने पैनल डिस्कशन में अपने सवालों को रिसोर्स पर्सन से पूछा और अपनी जिज्ञासा शांत की ।

ये रहे मौजूद

इस मौके पर प्रबंधन निर्देशक जी. एस. पठानिया और कार्यकारिणी निर्देशक डॉ बी. एस. पठानिया, एचओडी बीएड सुमित शर्मा सहित सभी शिक्षक उपस्थित रहे I

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