अमरनाथ यात्रा: एक ऐसा अनुभव, जो शारीरिक-मानसिक सीमाओं से परे ले जाकर शिव से जोड़ता है

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हिमखबर डेस्क

हिंदू धर्म के लोगों के लिए अमरनाथ यात्रा एक ऐसा अनुभव है, जो भक्तों को शारीरिक और मानसिक सीमाओं से परे ले जाकर भगवान शिव से जोड़ता है, उन्हें पापों से मुक्ति दिलाता है, मनोकामनाएं पूरी करता है और अंतत: मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है।

अमरनाथ यात्रा की सबसे प्रमुख मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक और पूरे विधि-विधान से अमरनाथ यात्रा करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति यानी मोक्ष की प्राप्ति होती है। यात्रा की कठिनाइयां और पवित्र वातावरण आत्मा को शुद्ध करता है, जिससे व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और पवित्रता का अनुभव होता है।

अमरनाथ यात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हर वर्ष पवित्र अमरनाथ गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्माण होता है। प्राकृतिक हिम से बनने के कारण इस शिवलिंग को स्वयंभू हिमानी शिवलिंग और बाबा बर्फानी भी कहा जाता है। अमरनाथ यात्रा के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है और बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए 3 जुलाई से यात्रा शुरू हो जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी स्थल पर भगवान शिव ने माता पार्वती को मोक्ष का मार्ग दिखाया था। इस ज्ञान को अमर कथा के नाम से जाना जाता है, इसलिए इस पवित्र स्थल का नाम अमरनाथ पड़ा। अमरनाथ को भगवान शिव का अत्यंत प्रिय निवास स्थान माना जाता है।

इस यात्रा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी असीम कृपा बरसाते हैं। कहा जाता है कि अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति को शिव का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मान्यता है कि एक मुस्लिम गड़रिए ने बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा की खोज की थी। आज भी उसके वंशजों को बाबा के दान में चढ़ाई गई राशि का एक हिस्सा दिया जाता है। अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी और 9 अगस्त रक्षा बंधन पर समाप्त होगी।

अमरनाथ हिंदुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 सहस्रमीटर दूर समुद्रतल से 13600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। गुफा 11 मीटर ऊंची है। अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।

अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है, क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं।

आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं। गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूंदें जगह-जगह टपकती रहती हैं। यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूंदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है।

चंद्रमा के घटने-बढऩे के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है, जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए।

मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग-अलग हिमखंड हैं। बाबा अमरनाथ धाम की यात्रा दो प्रमुख रास्तों से की जाती है। पहला रास्ता पहलगाम से बनता है और दूसरा सोनमार्ग बालटाल से।श्रद्धालुओं को यह रास्ता पैदल ही पार करना पड़ता है।

पहलगाम से अमरनाथ की दूरी 28 किलोमीटर है। ये रास्ता थोड़ा आसान है और सुविधाजनक है। जबकि बालटाल से अमरनाथ की दूरी तकरीबन 14 किलोमीटर है, लेकिन ये रास्ता पहले रूट की तुलना में कठिन है। बाबा बर्फानी की यात्रा धार्मिक दृष्टि से तो महत्त्वपूर्ण है ही साथ ही यहां के रोचक नजारे भी सबका मन मोह लेते हैं।

पांच किमी. की लंबी दुर्गम पैदल यात्रा करने के बाद जब व्यक्ति अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी हिमलिंग के दर्शन करता है, तो उसको एक अलग ही अनुभूति और सुकून का एहसास होता है। हिमालय की मनमोहक और शांत वादियां, बर्फ से ढके पहाड़ और शुद्ध वातावरण यात्रियों को प्रकृति से गहरा जुड़ाव महसूस कराता है।

यह अनुभव व्यक्ति को भीतर से शांत और तरोताजा कर देता है। यह यात्रा केवल एक भौतिक ट्रैक नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक परिवर्तनकारी अनुभव है। गुफा के अंदर की ऊर्जा और हिम शिवलिंग के दर्शन से भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यहां पर आए श्रद्धालु एक ही उद्देश्य के साथ यात्रा करते हैं, जिससे उनमें आपसी भाईचारे और एकता की भावना विकसित होती है।

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