अनदेखी का दंश झेल रहा ज्वाली का बस अड्डा

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पुराने बस अड्डे से हो रही बसों की आवाजाही; यात्रियों को बैठने की कोई सुविधा नहीं, कोलतार भी उखड़ी, कबूतरों ने जमाया डेरा

ज्वाली – व्यूरो रिपोर्ट

विस क्षेत्र ज्वाली के अधीन लाखों की लागत से निर्मित बस अड्डा मात्र सफेद हाथी बनकर रह गया है, जिसमें इक्का-दुक्का बसें ही पहुंचती हैं जबकि अन्य बसें पुराना बस अड्डा से ही वापस चली जाती हैं। बस अड्डा ज्वाली में सवारियों के बैठने के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

बस अड्डा के मैदान में डाली गई कोलतार उखड़ चुकी है तथा पीने योग्य पानी भी नहीं है। इस बस अड्डा को जवाली के लोगों ने डंपिंग साइट समझ कर घर से निकलने वाला मैटीरियल फैंक रखा है। बस अड्डा की छत पर की गई सीलिंग उखडऩे से उसमें कबूतरों ने डेरा जमा लिया है तथा हर तरफ कबूतरों द्वारा गंदगी फैलाई गई है।

बस अड्डा के काउंटर बंद ही दिखाई देते हैं। इस बस अड्डा की दुर्दशा को सुधारने की तरफ किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया, जबकि इस बस अड्डा का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा किया गया था और इसका उद्घाटन भी तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल द्वारा किया गया था।

बस अड्डा ज्वाली की दुर्दशा को लेकर जनता में काफी रोष व्याप्त है। बस अड्डा ज्वाली का शिलान्यास 19 जनवरी 2004 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा किया गया था फिर इसका उद्घाटन 15 अगस्त 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल द्वारा किया गया था।

हालांकि उसके बाद प्रदेश में भाजपा की भी सरकार बनी और कांग्रेस भी सत्तासीन हुई लेकिन बस अड्डा जवाली की दशा को नहीं सुधारा गया। ज्वाली से चंद्र कुमार, नीरज भारती ने कांग्रेस की तरफ से प्रतिनिधित्व किया परन्तु इस बस अड्डा को देखा तक नहीं जबकि डा. हरबंस राणा, अर्जुन सिंह ने भाजपा की तरफ से ज्वाली की बागडोर संभाली परन्तु बस अड्डा जवाली फिर भी अनदेखी का शिकार रहा।

बस अड्डा ज्वाली राजनीति का शिकार हो गया। इसकी कोई भी सरकार या राजनेता सुध नहीं ले रहा है। बस अड्डा जवाली की अगर सुध नहीं लेनी थी तो इसके निर्माण पर लाखों रुपए खर्च क्यों किए गए। बुद्धिजीवियों ने मांग की है कि बस अड्डा जवाली की दशा को सुधारा जाए ताकि इसका समुचित लाभ मिल सके।

वहीं भाजपा प्रत्याशी संजय गुलेरिया ने कहा कि भाजपा की सरकार बनते ही इस बस अड्डा को आधुनिक बनाया जाएगा तथा हर बस का अड्डा तक पहुंचना सनिश्चित किया जाएगा।

बस चालकों के बोल…

बस चालकों ने बताया कि बस अड्डा ज्वाली को ऐसी जगह पर बनाया गया है, जहां से बस को वापस लाना मुश्किल होता है। एकदम से सामने चढ़ाई होने के कारण बसें चढ़ाई नहीं चढ़ती हैं। बस अड्डा में टॉयलेट की भी कोई सुविधा नहीं है। बिना सुविधा बस अड्डा नाम का ही बस अड्डा है।

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