NH-105 पर कछुआ गति से निर्माण: खस्ता सड़कें, जाम और हादसे, सरकारों पर बरसे लोग

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NH-105 पर कछुआ गति से निर्माण: खस्ता सड़कें, जाम और हादसे, सरकारों पर बरसे लोग, पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ फोरलेन परियोजना में देरी, ठेकेदार फरार, स्थानीय लोग और उद्योगपति परेशान, सुखविंदर और मोदी सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग

नालागढ़ – रजनीश ठाकुर

नालागढ़ के नेशनल हाईवे 105 (पिंजौर-बद्दी-नालागढ़) पर चल रहे फोरलेन निर्माण कार्य की कछुआ गति और सड़कों की खस्ता हालत ने स्थानीय लोगों और उद्योगपतियों को गहरी निराशा में डाल दिया है।

हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, जो सरकार को करोड़ों रुपये जीएसटी और टैक्स के रूप में देता है, मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है।

इस 36 किलोमीटर लंबे मार्ग पर पिछले पांच सालों से निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन केवल 38.10% काम पूरा हुआ है, और ठेकेदार कंपनी पटेल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने काम छोड़कर भागने का रास्ता चुना।

सड़क की बदहाल स्थिति के कारण प्रतिदिन हजारों वाहन चालकों को घंटों जाम और खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में सड़कों पर गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे यह मार्ग नदी जैसा प्रतीत होता है।

इस मार्ग पर सैकड़ों दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान गई है। स्थानीय लोग और उद्योगपति पिछले दस सालों से इस सड़क को दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन न तो हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई।

इस मार्ग पर 20,000 से अधिक वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं, और 35,000 यात्री कार इकाई (PCU) की मौजूदगी इसे फोरलेन के लिए जरूरी बनाती है।

नालागढ़ विकास मंच के अध्यक्ष नरेश घई ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह शर्मनाक है कि प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक राजधानी में सड़कों की हालत इतनी खराब है। NH-105 के फोरलेन निर्माण को मार्च 2025 तक पूरा होना था, लेकिन ठेकेदार ने काम छोड़ दिया।

सरकार को करोड़ों रुपये टैक्स मिलते हैं, फिर भी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी क्यों?” उन्होंने हिमाचल की सुक्खू सरकार और केंद्र की मोदी सरकार व केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मांग की कि दोनों सरकारें आपसी तालमेल से इस मार्ग का निर्माण जल्द पूरा करें, ताकि लोगों को राहत मिले।

हिम परिवेश संस्था के सदस्य धर्मेंद्र चंदेल ने भी सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “पटेल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने भूमि अधिग्रहण और रोड मैप में देरी के कारण काम छोड़ दिया।

सरकार ने समय पर संसाधन उपलब्ध नहीं कराए, जिससे ठेकेदार को नुकसान हुआ और वह भाग गया। यह मार्ग औद्योगिक क्षेत्र की जीवनरेखा है, लेकिन सरकार की गंभीरता की कमी के कारण लोग रोज परेशानी झेल रहे हैं।” चंदेल ने दोनों सरकारों से तत्काल कार्रवाई और नई ठेकेदार कंपनी नियुक्त करने की मांग की।

इस मार्ग के निर्माण में देरी के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें भूमि अधिग्रहण में देरी, मिट्टी खनन की अनुमति में देरी, और बिजली लाइनों के स्थानांतरण में रुकावटें शामिल हैं।

नालागढ़ के विधायक हरदीप बावा ने भी विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था, और NHAI ने खेड़ा के पास मेडियन कट का वादा किया, लेकिन प्रगति धीमी है।

स्थानीय लोग और उद्योगपति अब एकजुट होकर सरकारों से इस मार्ग को प्राथमिकता देने और त्वरित निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि जाम, दुर्घटनाओं और आर्थिक नुकसान से निजात मिल सके।

यह देखना बाकी है कि सुखविंदर सरकार इस महत्वपूर्ण परियोजना को कब तक पूरा कर पाती हैं।

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