Breaking: सलूणी मर्डर केस, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, आग के हवाले किया आरोपियों का घर, धारा 144 लागू

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उपमंडल सलूणी में चार से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठे होने प्रतिबंध, ज़िला दंडाधिकारी अपूर्व देवगन ने धारा 144 के तहत जारी किए आदेश, बैठक, जुलूस, रैली, धरना- प्रदर्शन पर रोक, आदेश की उल्लंघना में होगी कार्रवाई

चम्बा – अनिल संबियाल

उपमंडल की ग्राम पंचायत भांदल में युवक मनोहर की निर्मम हत्या के आरोपी परिवार के सभी सदस्यों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गुरुवार को हजारों की तादाद में लोगों का हुजूम सडक़ों पर उतर आया।

दोपहर बाद गुस्साई भीड़ ने किहार से पैदल संघणी का रूख किया। करीब दस किलोमीटर का पैदल फासला तय करके संघणी पहुंची गुस्साई भीड़ ने आरोपियों के दो मकानों को आग लगा दी।

मौके की नाजुकता को भांपते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। पुलिस इलाके में होने वाली हर गतिविधि पर निगाह रखे हुए है।

गौर हो कि बीते सप्ताह हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के सलूणी उपमंडल के तहत आती भांदल पंचायत में एक युवक का क्षत-विक्षत शव बोरी में डालकर नाले में फेंका हुआ मिला था। हत्या के बाद शरीर के 7-8 टुकड़े किए गए। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

इसी बीच गुस्साई भीड़ ने मनोहर की निर्मम हत्या कर उसके 8 टुकडे़ करने वाले आरोपियों के घर को आग के हवाले कर दिया है। प्रशासन की तरफ से आगामी 7 दिन तक इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है।

ज़िला दंडाधिकारी अपूर्व देवगन ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1993 की धारा 144 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए  उपमंडल  सलूणी  में  चार से अधिक  व्यक्तियों  के इकट्ठे होने ,  किसी भी प्रकार की बैठक, जुलूस, रैली,  धरने- प्रदर्शन के  आयोजन  को  प्रतिबंधित करने के आदेश जारी किए हैं ।
यह आदेश तुरंत प्रभाव से आगामी 7 दिनों तक  प्रभावी  रहेंगे  और प्रतिकूल परिस्थितियों के दौरान इस आदेश को  आगे भी बढ़ाया जा सकता है । जारी आदेश में कहा गया है कि संघणी, किहार तथा सलूणी  में स्थानीय निवासियों के बीच उपजे विवाद के दृष्टिगत कानून व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा ये आदेश जारी किए गए हैं ।
आगे आदेश में कहा गया है लोगों द्वारा प्रदर्शन और जुलूस आयोजित करने से सांप्रदायिक तनाव  उत्पन्न होने की आशंका  तथा जान- माल की सुरक्षा  को गंभीर   खतरा उत्पन्न हो सकता है।  कोई भी व्यक्ति किसी भी   संप्रदाय के प्रति अपमानजनक और भेदभावपूर्ण टिप्पणी नहीं  कर सकता है ।
इसके साथ किसी भी मीडिया के माध्यम से व्यक्ति विशेष द्वारा अभद्र टिप्पणी नहीं करने को कहा गया है जो सांप्रदायिक तनाव का कारण बनता  हो।  आदेश के उल्लंघन की अवस्था में भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा ।
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