
नगरोटा सुरियाँ – शिव गुलेरिया
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने गैरकानूनी खनन गतिविधियों से पौंग बांध अभयारण्य को नुकसान पहुंचाने पर दायर याचिका पर प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्य प्राणी) से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश अमजद ए सईद व न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता एमआर शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के बाद चार सप्ताह में अभयारण्य को सुरक्षित बचाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों से अवगत करवाने को कहा है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला पौंग बांध अभयारण्य असामाजिक तत्वों की ओर से की जा रही अवैध खनन गतिविधियों के कारण गंभीर खतरे में है। अवैध खेती से वन्य जीव और पौधे खत्म हो रहे हैं। भारी मशीनरियों के उपयोग से भू-क्षरण हो रहा है।
उर्वरक व कीटनाशकों का उपयोग कर वन्य प्राणियों के साथ पौधों को नष्ट किया जा रहा है। फसलों के अवशेष को आग लगाकर भी अभयारण्य को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। प्रार्थियों ने उक्त क्षेत्र को गैर कानूनी गतिविधियों से बचाने का आदेश जारी करने की मांग की है। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है व संबंधित अधिकारियों से खनन और खेती को लेकर जवाब मांगा है। पौंग डैम बनने से हजारों लोग बेघर हुए थे।
