हिमाचल में बारिश बनी आफत, जगह-जगह भूस्खलन, बाढ़ से कई सड़कें बन्द,140 की मौत

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शिमला, 01 अगस्त – जसपाल ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मानसून की बरसात आफत बनकर बरस रही है। जनजातीय जिलों लाहौल-स्पीति और किन्नौर में फ्लैश फ्लड की घटनाओं से जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है। कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, सिरमौर और शिमला जिलों में कुछ स्थानों पर रविवार को जमकर मेघ बरसे।

लगातार हो रही बरसात की वजह से जगह-जगह भूस्खलन, बाढ़ और सड़कें धंसने का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग व जिला प्रसाशन ने घरों से बाहर निकलने पर लोगों को एहतियात बरतने और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा न करने की सलाह दी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को राज्य में भारी वर्षा से 10 कच्चे-पक्के मकान, 11 दुकानें और चार पशुशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।

कांगड़ा जिला में छह, हमीरपुर में दो, बिलासपुर में एक कच्चे मकान और सिरमौर में एक पक्के मकान को आंशिक नुकसान पहुंचा है। सिरमौर जिला में भारी वर्षा से नौ और चम्बा में दो दुकानें क्षतिग्रस्त हुईं हैं। इसके अलावा भूस्खलन से 50 के करीब सड़कें, 100 ट्रांसफार्मर और 7 पेयजल परियोजनाएं बंद पड़ी हैं। अकेले मंडी जिला में 95 ट्रांसफार्मर और छह सड़कें बंद है।

बरसात की वजह से पेश आए  हादसों में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि 16 घायल हुए हैं। शिमला जिला में पहाड़ी से गिरने के कारण एक व्यक्ति मारा गया।  मंडी में छह, ऊना में पांच, चम्बा में चार और सोलन में एक व्यक्ति घायल हुए है। मौसम विभाग ने राज्य में अगले चार दिन भारी बारिश की आशंका जाहिर की है। आगामी चार अगस्त तक मैदानी व मध्यप्रवतीय क्षेत्रों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

बीते 24 घण्टों के दौरान कांगड़ा जिला के मुख्यालय धर्मशाला में सर्वाधिक 137 मिमी बारिश रेकॉर्ड की गई है। इसके अलावा भराड़ी में 77, बैजनाथ में 68, नैना देवी में 62, कुमारसेन व मशोबरा में 41-41, चूड़ी व कसौली में 36-36, मंडी में 35, पंडोह में 34, पालमपुर व डलहौजी में 32-32 और जोगेंद्रनाथ में 31 मिमी बारिश दर्ज हुई है।

हिमाचल में  मानसून की बरसात से 29 जून से अब तक 140 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 233 घायल व 6 लोग अभी लापता है।  बरसात  से 4 सौ 52 करोड़ का नुकसान हो चुका है। सबसे ज्यादा नुकसान PWD को हुआ है। 104 पशु पक्षी बरसात की भेंट चढ़ चुके हैं। 73 कच्चे व पक्के मकान पानी में बह चुके हैं, जबकि दो सौ कच्चे पक्के घरों को नुकसान हुआ है। 212 गौशालाएं पानी में बही है तो, वहीं 38 दुकानें व शेड बहे हैं।

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