सोलन – रजनीश ठाकुर
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए प्रदेशभर में लगाया जा रहा टीका ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) जहां एक ओर किशोरियों को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से बचाएगा, वहीं विदेश जाने के लिए भी अब यह अनिवार्य होगा।
टीका लगवाने के लिए निर्धारित आयु की किशोरियों को अगर विदेश जाना होगा तो उन्हें पहले यह सर्टिफिकेट दिखाना होगा तभी उन्हें विदेशों में एंट्री मिलेगी। इसके लिए पहले ही फार्म भरते समय ही इसका प्रमाण पत्र देना होगा।
यह सर्टिफिकेट हर किशोरी को टीका लगाने के समय विभाग की ओर से दिया जा रहा है। प्रदेशभर में 14-15 वर्ष की 65 हजार किशोरियों को 90 दिनों में एचपीवी के टीके लगाए जाएंगे।
21 जून तक यह अभियान चलेगा। हालांकि शुरूआत अभी धीमी चल रही है। चिकित्सकों का दावा है कि इस टीके का असर 26 साल तक रहता है।
किशोरियों को एचपीवी का गार्डासिल-4 टीका लगवाया जा रहा है। यह मर्क एंड कंपनी द्वारा निर्मित है और वर्ष 2006 में यह बाजार में उतार दिया गया था। यह एक अमेरिका की बहुराष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल कंपनी है।

भारत में इसे इसके सहयोगी एमएसडी फार्मास्यूटिकल्स द्वारा वितरित किया जा रहा है। हालांकि निजी क्लीनिकों में यह टीका करीब 12 से 15 हजार रुपये में लगाया जाता है। मगर हिमाचल में यह निशुल्क लगाया जा रहा है।
160 देशों में लग चुकी हैं 500 मिलियन डोज
एचपीवी को स्वास्थ्य विभाग सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा कवच मान रहा है। गार्डासिल-4 का टीका 160 देशों में लगाया गया है। डॉक्टरों के अनुसार अब तक इसकी 500 मिलियन डोज लगाई जा चुकी है। एचपीवी एक ऐसा वायरस है जो कम से कम छह तरह के कैंसर का कारण बन सकता है।
डॉ. परविंद्र सिंह, बीएमओ धर्मपुर के बोल
एचपीवी का टीका विदेश जाने के लिए भी लगवाना अनिवार्य है। फार्म भरते समय इसका सर्टिफिकेट दिखाना भी जरूरी किया गया है। 160 देशों में यह टीका लगाया जा रहा है, जिसकी अब तक 500 मिलियन डोज लगाई जा चुकी हैं।
अभिभावकों से अपील है कि वे अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करें। यह टीका न केवल यात्रा के लिए जरूरी है, बल्कि गंभीर बीमारी से सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

