हिमखबर डेस्क
खाकी वर्दी, हाथ में डंडा और चेहरे पर अनुशासन-आम तौर पर पुलिस की यही तस्वीर हमारे जेहन में उभरती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस धारणा को बदलते हुए अपने जवानों के भीतर छिपे ‘संवेदनशील कलाकार’ को दुनिया के सामने पेश किया है। शिमला कर गेयटी थियेटर में पुलिस जवानों की तीन दिवसीय पेंटिंग प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, जिसका शुभारंभ महापौर सुरेंद्र चौहान ने किया जहां प्रदेश के कार्यकारी पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

महापौर सुरेंद्र चौहान ने जवानों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस का यह ‘दूसरा चेहरा’ वाकई सुखद है। पुलिस कर्मियों ने ‘चिट्टा’ (नशा) जैसे सामाजिक अभिशाप को कैनवास पर बहुत ही मार्मिक ढंग से उकेरा है। पेंटिंग्स में प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है। महापौर ने घोषणा की कि आने वाले समय में ‘शिमला हाट’ में पुलिस कलाकारों को विशेष स्थान दिया जाएगा ताकि उनकी कला को स्थाई मंच मिल सके।
कार्यकारी DGP अशोक तिवारी ने कहा कि जनता को यह जानना जरूरी है कि पुलिस केवल डंडा या बंदूक चलाना ही नहीं जानती; उनके पास भी भावनाएं और रचनात्मकता है। पिछले कुछ महीनों से हम उन जवानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं जो हैंडीक्राफ्ट, ऑयल पेंटिंग और वॉटर कलर जैसी विधाओं में माहिर हैं। मेयर के सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए DGP ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कलाकार अपनी कृतियों को व्यावसायिक रूप से बेचना चाहते हैं, तो विभाग इस पर गंभीरता से विचार करेगा और उचित निर्णय लेगा।

