सिरमौर – नरेश कुमार राधे
जब आसमान से गिरती बर्फ की सफेद चादर धरती को ढक रही थी, उसी ठंडी हवाओं के बीच हिमाचल की मिट्टी ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। चारों ओर बर्फ, नम आंखें और “शहीद कपिल अमर रहें” के गगनभेदी नारे… यह दृश्य हर दिल को भीतर तक झकझोर देने वाला था।
भारतीय सेना के जांबाज जवान शहीद ग्रेनेडियर कपिल का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में किया गया, जहां बर्फबारी के बीच तिरंगे में लिपटा यह लाल पंचतत्व में विलीन हो गया। सिरमौर जिला के शिलाई तहसील अंतर्गत गांव पटना निवासी ग्रेनेडियर कपिल सेना से छुट्टी लेकर माता-पिता और परिवार से मिलने आए थे। किसे पता था कि यह मुलाकात आखिरी होगी।
8 जनवरी को उत्तराखंड के सेलाकुई में हुए मोटरसाइकिल सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले सेलाकुई के ग्राफिक एरा अस्पताल और फिर हालत बिगड़ने पर सैन्य अस्पताल देहरादून रेफर किया गया। कई दिनों तक वे जिंदगी और मौत से जूझते रहे।

माता-पिता, भाई-बहन, रिश्तेदार और पूरा गांव दुआओं में जुटा रहा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान उन्होंने देश के लिए आखिरी सांस ली। जैसे ही उनके निधन होने की खबर गांव पटना पहुंची, पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। पिता पंच राम और माता जयंती देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस बेटे के विवाह के सपने संजोए जा रहे थे, वही बेटा अब तिरंगे में लिपटकर घर लौटा।
2 जून 1998 को जन्मे ग्रेनेडियर कपिल वर्ष 2018 में ग्रेनेडियर रेजिमेंट की 16वीं बटालियन में भर्ती हुए थे और वर्तमान में 55वीं राष्ट्रीय राइफल्स के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। सात वर्षों की सेवा में उन्होंने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और साहस की मिसाल पेश की।
पांवटा साहिब में भूतपूर्व सैनिक संगठन पांवटा-शिलाई क्षेत्र और सैन्य टुकड़ी ने उनकी पार्थिव देह का सम्मानपूर्वक स्वागत किया। इसके बाद गांव पटना में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सैन्य टुकड़ी ने अंतिम सलामी दी और शहीद कपिल पंचतत्व में विलीन हो गए। हिमाचल का यह वीर सपूत भले ही आज हमारे बीच नहीं रहा, लेकिन उसकी शहादत हमेशा देश और प्रदेश के युवाओं को प्रेरणा देती रहेगी।

