हिमखबर डेस्क
किन्नौर जिले की तारांडा पंचायत के वीर सपूत और असम राइफल्स के जवान शहीद जय कृष्ण का पार्थिव शरीर शुक्रवार को जब उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा इलाका शोक में डूब गया। बर्फ से ढकी वादियों के बीच तिरंगे में लिपटे वीर सपूत की अंतिम यात्रा निकली तो हर आंख नम थी और हर दिल गर्व से भरा हुआ। “शहीद जय कृष्ण अमर रहें” के नारों से घाटी गूंज उठी और गांव की गलियों से लेकर श्मशान घाट तक देशभक्ति और शोक का भाव एक साथ दिखाई दिया।
उपायुक्त किन्नौर डॉ अमित कुमार शर्मा ने बताया कि शहीद जय कृष्ण असम राइफल्स में सेवाएं दे रहे थे और पिछले कुछ समय से कोलकाता के कमांड अस्पताल में उपचाराधीन थे। वहीं उपचार के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की। प्रशासन को सूचना मिलते ही पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाने की व्यवस्था की गई।
अंत्येष्टि के दौरान सेना और पुलिस की टुकड़ियों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर शहीद को अंतिम सलामी दी। एसडीएम भावानगर सहित जिला प्रशासन के अधिकारी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस जवान और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। शहीद की पत्नी, माता और परिजन अपने आंसू नहीं रोक सके, लेकिन चेहरे पर बेटे और पति के बलिदान का गर्व साफ झलक रहा था।
गौरतलब है कि जय कृष्ण वर्ष 2005 में असम राइफल्स में भर्ती हुए थे और वर्ष 2009 में असम में उग्रवादियों के खिलाफ मुठभेड़ के दौरान अदम्य साहस दिखाने पर उन्हें भारतीय सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। किन्नौर का यह वीर सपूत अपने पीछे माता, पत्नी, पुत्र और भाई को छोड़ गया है। क्षेत्रवासियों ने कहा कि जय कृष्ण केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि पूरे किन्नौर का गौरव थे। उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा और बलिदान की प्रेरणा देती रहेगी।

