जिला चम्बा की विधानसभा भाटियात के ककीरा के तहत पड़ती जरई पंचायत के मगनूई गांव के आशीष बने असिस्टेंट टैक्सेशन एवं एक्साइज ऑफीसर, गांववासियों ने गांव पहुंचने पर किया आशीष का जोरदार स्वागत, गांव में खुशी का माहौल।
चम्बा – भूषण गुरूंग
आज जिला चंबा के भटियात क्षेत्र के ककीरा जरई पंचायत के मगनूई गांव के एक गरीब किसान के परिवार से ताल्लुक रखने वाला आशीष पुत्र केवल सिंह गांव मगनूई ने बताया कि जो आज मेरे बेटे ने जो मुकाम हासिल की है वो किसी से छुपी नहीं है।
एलाइड सर्विस एग्जाम में मेरे बेटे आशीष ने के द्वारा असिस्टेंट टैक्सेशन व एक्साइज ऑफिसर के पद में सफलता प्राप्त की है जिससे उनके गांव मगनूई मैं खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
आज सुबह ठीक लगभग 11:30 बजे के करीब आशीष पुत्र केवल सिंह जब बस के माध्यम से जब अपने गांव मंहनूई पहुंचे तो उनका गांव वासियों के द्वारा भव्य स्वागत किया गया गांव पहुंचने पर उनकी माता शीला देवी ने अपने बेटे के ऊपर पुष्प वर्षा कर उनका जोरदार स्वागत किया।
उसके बाद उनके पिता श्री केवल सिंह के द्वारा अपना बेटे को गले लगाते हुए कहा कि आज मुझे अपने बेटे पर बहुत गर्व है की जिसने अपनी कड़ी मेहनत के कारण इतना बड़ा मुकाम हासिल किया उसके माता पिता ने अपने होनहार बेटे को माथे में तिलक लगाकर उनकी दोनों बहनों ने उनको आरती उतारने के बाद सभी परिवार को लोगों के द्वारा उनको मीठा मुंह कराया गया।
उसके बाद घर में आए हुए सभी मेहमानों को अपने बेटे का एक अधिकारी के उस चयनित होने पर सभी लोगों को जलपान कराएगा गया।
इस मौके में जराई पंचायत के उपप्रधान संदीप थापा के अलावा पंचायत मेंबर और हिमाचल युवा शक्ति के अध्यक्ष संजय कपूर के अलावा के गणमान्य लोक मौजूद थे।
जब इस बाबत आशीष को पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी प्राथमिक पढ़ाई राजकीय प्राथमिक पाठशाला बड़ेला से की और 6th से 12वीं तक की शिक्षा राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ककीरा से की।
उसके पश्चात उन्होंने अपने स्नातक एमसीएम डी ए वी कॉलेज कांगड़ा की उसके बाद 2021 से कठिन संघर्ष की शुरुआत हुई। इससे पहले HAS मैं दो प्रयत्न किया परंतु कुछ अंकों से रह गए।
लेकिन बरस 2024 – 25 के इस एलाइड सर्विस एग्जाम में कठोर संघर्ष के परिणाम स्वरूप मुझे 31 में रैंक के साथ असिस्टेंट टैक्सेशन व एक्साइज ऑफीसर के पद पर सफलता प्राप्त हुई।
उन्होंने बताया कि वह दिन में लगभग 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे। इस मुकाम में पहुंचने के लिए उन्होंने बताया कि इसका श्रेय में अपने माता-पिता बड़ी बहन,अपने भगवान अपने गुरुजनों दोस्तों के सहयोग़ को श्रेय देना चाहूंगा जिसमें माता-पिता का योगदान सब श्रेष्ठ है।

