एसपीओ ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर की आत्महत्या की कोशिश, 1200 नंबर पर कॉल करके बताई अपनी परेशानी, विधायक के आश्वासन के बाद उतरने को हुआ तैयार
चम्बा – भूषण गुरुंग
उपमंडल डलहौजी के बनीखेत कस्बे में पुलिस, दमकल विभाग व अन्य लोगों में उस समय हडकंप मच गया। जब जम्मू-कश्मीर का एक एसपीओ (स्पेशल पुलिस आफिसर) बनीखेत-खैरी मार्ग पर आत्महत्या करने के इरादे से एक ऊंचे पेड़ पर चढ़ गया।
पुलिस विभाग व दमकल विभाग के कर्मचारियों, जन प्रतिनिधियों व लोगों की ओर से लाख समझाने के बावजूद शाम लाल पेड़ से उतरने को तैयार नहीं हुआ। पेड़ पर चढ़ने से पहले शाम लाल ने कॉल कर जानकारी दी थी कि वह जम्मू-कश्मीर में एसपीओ के पद पर कार्यरत है।
उसका मानदेय काफी कम होने के कारण व आर्थिक तंगहाली में है। कई बार जम्मू-कश्मीर सरकार से गुहार लगाने के बावजूद उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में तंग आकर वह आत्महत्या करने के लिए बनीखेत के समीप करीब दोपहर 12 बजे से पेड़ पर चढ़ा हुआ है।
हेल्पलाइन से पुलिस को सूचना मिलने पर एसएचओ डलहौजी जगबीर सिंह सहित काफी संख्या में पुलिस बल, दमकल विभाग के कर्मचारी, जनप्रतिनिधि व अन्य लोग मौका पर जुट गए और शाम लाल को पेड़ से उतरने के लिए मिन्नतें करने लगे।
दमकल विभाग के कर्मचारियों की ओर से पेड़ के नीचे जाला भी लगा दिया गया और लंबी सीढ़ी भी मौका पर लाई गई थी। जबकि पुलिस कर्मचारी शाम लाल को समझा रहे थे। मगर, शाम लाल पेड़ से नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस कर्मचारियों की ओर से पूछे जाने पर उसने अपना पहचान पत्र नीचे फेंका और कहा कि उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
उसने बताया कि मौका पर जम्मू के बणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामेश्वरम सिंह के मौका पर पहुंचकर उसे आश्वासन दिए जाने के बाद ही पेड़ से उतरेगा। पुलिस व दमकल जवानों सहित लोग मौके पर मौजूद थे। यह हाई वोल्टेज ड्रामा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।
एसएचओ जगबीर सिंह की ओर से फौरन बणी विस क्षेत्र के विधायक से फोन पर संपर्क कर सारी जानकारी दी गई। जिस पर विधायक ने जल्द मौका पर पहुंचने की बात कही। बानी (कठुआ, जम्मू-कश्मीर) से डलहौजी की दूरी लगभग 68 किलोमीटर है, जो सड़क मार्ग से लगभग 2 घंटे की दूरी है। विधायक रमेश्वर सिंह लगभग रात 9:20 बजे पहुंचे।
SPO श्याम लाल ने विधायक को बताया कि पहले उन्हें ₹18,000 वेतन मिलता था, जिसमें उन्होंने कई जोखिम और कठिनाइयां सहीं। पर अब उनका वेतन घटाकर केवल ₹4,000 कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने सबसे मुश्किल दौर में भी काम किया, मेरा बच्चा चंडीगढ़ में है, हमने कर्ज लिया है, लेकिन अब हमारी तनख्वाह मात्र ₹4,000 रह गई है, इससे रोजमर्रा की जिंदगी कैसे चलेगी।
इस पर बानी MLA ने कहा, “यह कदम सही नहीं था, लेकिन उन्होंने यह कदम उठाने के लिए हिमाचल तक आना पड़ा।जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए वेतन का निर्णय केंद्र सरकार के पास है। कोरोना महामारी के बाद वेतन कम कर दिया गया।
स्थानीय अधिकारी SPO की दुर्दशा से प्रभावित हुए और उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से SPO के वेतन एवं अन्य समस्याओं को लेकर बात करने की बात कही। घटना के बाद किसी भी तरह का मामला दर्ज नहीं किया गया। SPO को मेडिकल जांच के बाद विधायक के साथ जम्मू-कश्मीर लौटने की अनुमति दी गई। पुलिस ने यह भी जांच की कि क्या उन्होंने कोई नशीला पदार्थ लिया है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया।