शिमला, 27 फरवरी – रजनीश ठाकुर
हिमाचल में राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा व कांगे्रस के 34-34 पर टाई होने की संभावना बढ़ गई है। अटकलें लगाई जा रही थी कि कांग्रेस के 6 विधायकों ने क्राॅस वोटिंग की है। इसी बीच सीएम सुक्खू ने इस बात पर मुहर लगा दी है।
सीएम सुक्खू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के 6 विधायकों को किडनैप कर लिया गया है। इसमें तीन निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं।
सीएम ने बताया कि सीआरपीएफ व हरियाणा पुलिस की कॉन्वॉय विधायकों को लेकर गई है।
उधर, सीएम ने भाजपा नेताओं पर पोलिंग अफसर को धमकाने के आरोप भी लगाए। हालांकि, बात-बात में सीएम ने ये भी कह दिया कि कांग्रेस के पास पूरी मैज्योरिटी है, अभी काउंटिंग शुरू हुई है, नतीजा आने तक इंतजार करें।
बताया जा रहा है कि भाजपा कांग्रेस के 6 व तीन निर्दलीय विधायकों को मतदान के तुरंत बाद हरियाणा के पंचकुला ले गई है।
ऐसा बताया जा रहा है कि राज्यसभा के मतदान के बाद 9 विधायक वापस सदन की कार्यवाही में नहीं पहुंचे। इस कारण क्राॅस वोटिंग की आशंकाएं प्रबल हो गई।
विधानसभा में राज्यसभा के बदले गणित में सुक्खू सरकार खतरे में आ गई है। विधानसभा में विधायकों की संख्या 68 है। इसमें कांग्रेस के 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा के 25 व तीन निर्दलीय हैं।
भाजपा ने कांग्रेस के 6 व 3 निर्दलीयों को लेकर स्कोर 34 का कर लिया। विधानसभा में भी सुक्खू सरकार को बहुमत के लिए 35 के आंकड़े की जरूरत होगी।
ऐसी भी चर्चा हो रही कि यदि कांग्रेस के 6 विधायक बुधवार को विधानसभा नहीं पहुंचते तो सुक्खू सरकार अल्पमत में आ जाएगी।
दरअसल, राज्यसभा का मतदान पूरा होने के करीब एक घंटे बाद क्रॉस वोटिंग की अटकलें तेज हो गई। समूचे प्रदेश में क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीति खासी गरमा गई। बता दें कि चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन बबलू को हेलीकॉप्टर से मतदान के लिए लाया गया था।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सदन से वॉकआउट के बाद यहां तक कह दिया था कि सुक्खू सरकार सदन में विश्वास खो चुकी है। सरकार अल्पमत में है।
भाजपा ने राज्यसभा की सीट पर हर्ष महाजन का नामांकन दाखिल कर सबको चौंका दिया था। वैसे राज्यसभा का चुनाव सर्वसम्मति से होने की परंपरा रही है। इक्का-दुक्का मामलों में ही चुनाव हुआ है। क्राॅस वोटिंग की आशंका को ऑप्रेशन लोटस से भी जोड़कर देखा जाने लगा था।
भाजपा के नामांकन दाखिल करने के बाद से ही क्राॅस वोटिंग की आशंकाओं ने खासा तूल पकड़ लिया था, जब विधायक राजेंद्र राणा ने यह तक कह दिया था कि वो भाजपा में जा सकते हैं।
उधर, धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने ये कहा था कि वो मंत्री नहीं बनना चाहते। सरकार को 14 महीने हो चुके हैं, लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस ने चुनाव को लेकर ये भी कहा था कि वोट किसको दे रहे हैं, ये विधायकों को पोलिंग एजेंट को दिखाना होगा।
सुक्खू सरकार पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप अंदर खाते लगता आ रहा है। राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के व्हिप को लेकर भी मंगलवार को खासा असमंजस रहा।
चूंकि, नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस के व्हिप को लेकर विरोध किया था, लिहाजा उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा था कि व्हिप की राज्यसभा चुनाव में कोई आवश्यकता नहीं है।
चुनाव परिणाम आने से चंद मिनट पहले ये भी क्यास लगाए जाने लगे थे कि 9 विधायकों को भाजपा चंडीगढ़ ले गई है।
क्या है व्हिप
व्हिप राजनीतिक दल का एक अधिकार होता है, जिसकी कार्य विधायिका में पार्टी अनुशासन सुनिश्चित करना होता है। इसका मतलब ये सुनिश्चित करना है कि पार्टी के सदस्य अपनी व्यक्तिगत विचारधारा या घटकों की इच्छा की बजाय पार्टी मंच के अनुसार मतदान करें।
साधारण शब्दों में व्हिप का उद्देश्य ये सुनिश्चित करना होता है कि जो विधायक एक राजनीतिक दल के सदस्य हैं, वो पार्टी नेतृत्व के आदेशानुसार मतदान करें।
बता दें कि राज्यसभा की सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल पूरा होने के बाद रिक्त हो रही है। नड्डा का कार्यकाल 2 अप्रैल को पूरा होना था।

